हरिश जोशी हत्याकांड ने क्यों भड़काया जनआक्रोश? विधायक के खिलाफ नारे, सांसद से बातचीत से इनकार की पूरी कहानी

Edited By Anil Jangid, Updated: 08 Jan, 2026 05:48 PM

rajsamand residents protest police inaction in harish joshi murder case

राजसमंद। धोईंदा निवासी हरिश जोशी की हत्या का मामला अब एक साधारण आपराधिक घटना से आगे बढ़कर प्रशासनिक कार्यप्रणाली, पुलिस की भूमिका और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन गया है। जैसे-जैसे मामले के तथ्य सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे समाज में...

राजसमंद। धोईंदा निवासी हरिश जोशी की हत्या का मामला अब एक साधारण आपराधिक घटना से आगे बढ़कर प्रशासनिक कार्यप्रणाली, पुलिस की भूमिका और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर बड़ा सवाल बन गया है। जैसे-जैसे मामले के तथ्य सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे समाज में आक्रोश गहराता जा रहा है। बुधवार को यही आक्रोश राजसमंद जिला कलेक्ट्रेट परिसर में खुलकर फूट पड़ा, जहां सैकड़ों की संख्या में समाजजन एकत्रित होकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन पर उतर आए।

 

सुबह से ही लोग कलेक्ट्रेट पहुंचने लगे और कुछ ही देर में पूरा परिसर नारों से गूंज उठा। प्रदर्शनकारियों ने कांकरोली थाना पुलिस पर गंभीर लापरवाही, दबाव में काम करने और आरोपियों को बचाने के आरोप लगाए। लोगों की मांग थी कि इस पूरे मामले में जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों को तत्काल निलंबित किया जाए और निष्पक्ष जांच हो।

 

नौकरी, मुआवजा और उच्च स्तरीय जांच की मांग
प्रदर्शन कर रहे समाजजनों ने मृतक हरिश जोशी के परिजनों के लिए सरकारी नौकरी, दो करोड़ रुपये का मुआवजा और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग रखी। उनका कहना था कि यदि पुलिस ने समय रहते गुमशुदगी की रिपोर्ट पर गंभीरता दिखाई होती, तो शायद हरिश जोशी की जान बच सकती थी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता ने कांकरोली थाने के सहायक उप निरीक्षक जलेसिंह को लाइन हाजिर कर दिया, लेकिन इससे भी प्रदर्शनकारियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ।

 

कलक्टर से वार्ता, लेकिन असंतोष बरकरार
जिला कलक्टर अरुण कुमार हसीजा ने मौके पर पहुंचकर समाजजनों से संवाद किया और जांच के लिए केस ऑफिसर नियुक्त करने व अन्य मांगों पर विचार का आश्वासन दिया। बाद में प्रतिनिधिमंडल से अलग से बातचीत भी हुई, लेकिन ठोस निर्णय न होने से नाराजगी बनी रही।

 

विधायक के खिलाफ नारे क्यों लगे?
प्रदर्शन के दौरान “राजसमंद मेरा परिवार” जैसे अभियानों पर सवाल उठे। लोगों ने कहा कि जब पीड़ित परिवार न्याय के लिए सड़कों पर है, तब जनप्रतिनिधि नजर नहीं आ रहे। इसी आक्रोश में विधायक दीप्ति माहेश्वरी के खिलाफ नारेबाजी शुरू हो गई, जिससे माहौल और गर्मा गया।

 

सांसद से बातचीत से इनकार
घटनाक्रम के दौरान सांसद महिमा कुमारी मेवाड़ का फोन आया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की इच्छा जताई, लेकिन लोगों ने साफ इनकार कर दिया। उनका कहना था कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। हालांकि सांसद ने बाद में जिला कलक्टर से बात कर मुख्यमंत्री को मामले से अवगत कराने का भरोसा दिलाया।

 

पुलिस पर गंभीर आरोप
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने न तो समय पर जांच की और न ही जरूरी सबूत जुटाए। यहां तक कि आरोपियों को पकड़कर छोड़ने और सबूतों से छेड़छाड़ के आरोप भी लगाए गए। फिलहाल प्रशासन ने 48 घंटे में गहन जांच का आश्वासन दिया है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इससे लोगों का टूटा विश्वास लौट पाएगा?

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