देदरौली के जौहरी के पुरा में एनीकट की दीवार ढही, घटिया निर्माण सामग्री का आरोप

Edited By Anil Jangid, Updated: 21 May, 2026 02:51 PM

wall of newly built anicut collapses in dedrauli johri ke pura

करौली। हिण्डौन के गांव देदरौली में जौहरी के पुरा क्षेत्र में नव निर्मित एनीकट की दीवार अचानक ढह गई, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता और नाराजगी फैल गई। स्थानीय निवासी हेमराज जगरवाड ने बुधवार सुबह बताया कि जल स्वालंबन योजना के तहत बन रहे इस एनीकट में...

करौली। हिण्डौन के गांव देदरौली में जौहरी के पुरा क्षेत्र में नव निर्मित एनीकट की दीवार अचानक ढह गई, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता और नाराजगी फैल गई। स्थानीय निवासी हेमराज जगरवाड ने बुधवार सुबह बताया कि जल स्वालंबन योजना के तहत बन रहे इस एनीकट में ठेकेदार द्वारा घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया जा रहा था। उनका कहना है कि इसी कारण निर्माण कार्य पूरी तरह से पूरा होने से पहले ही दीवार गिर गई।

 

हेमराज जगरवाड ने जिला प्रशासन और कलेक्टर को पहले भी इस मामले में अवगत कराया था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इस हादसे ने पूरे क्षेत्र में जल संरक्षण के प्रयासों को खतरे में डाल दिया है। इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि श्री महावीर जी क्षेत्र में जलस्वालंबन योजना के तहत बन रहे सभी एनीकटों के निर्माण कार्य की स्वतंत्र जांच की जाए।

 

स्थानीय लोगों का कहना है कि ठेकेदार की लापरवाही और घटिया सामग्री के इस्तेमाल के कारण ही यह दुर्घटना हुई है। हेमराज ने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर ठेकेदार केशुराम मीना द्वारा उनके खिलाफ जान से मारने की धमकी दी जा रही है और झूठे मुकदमे दर्ज कराने की चेतावनी दी जा रही है।

 

इस मामले पर ठेकेदार केशुराम मीना का कहना है कि उन्होंने सरकारी मापदंडों के अनुसार ही निर्माण कार्य किया है और हेमराज द्वारा लगाए गए आरोप निराधार हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि दीवार गिरने की घटना में शिकायतकर्ता की ही भूमिका है और उन्होंने ही एनीकट को नुकसान पहुँचाया।

 

गांववासियों और क्षेत्रीय प्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द इस मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि जलस्वालंबन योजना जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं में लापरवाही की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

 

इस घटना ने ग्रामीण समुदाय में जल संरक्षण कार्यों और सरकारी परियोजनाओं की निगरानी की आवश्यकता को उजागर किया है। अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाकर यह सुनिश्चित करना होगा कि निर्माण कार्य सही मापदंडों के अनुसार ही पूरे हों और किसी भी तरह की सुरक्षा खतरे से बचा जा सके।

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