700 मीटर ऊंचाई तक बन गए मकान-रिजॉर्ट, ISRO ने दिखाया 52 साल में हुआ Aravalli का हश्र

Edited By Anil Jangid, Updated: 10 Aug, 2026 02:38 PM

udaipur homes and resorts built up to 700 metres high isro study aravallis

उदयपुर: अरावली पहाड़ियों के संरक्षण का जायजा लेने और स्थानीय लोगों से बातचीत करने के लिए 9 व 10 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की विशेष समिति उदयपुर के दौरा कर रही है। लेकिन इस अहम दौरे के समय एक वैज्ञानिक शोध ने झीलों की नगरी में अरावली की चोटियों पर चल...

उदयपुर: अरावली पहाड़ियों के संरक्षण का जायजा लेने और स्थानीय लोगों से बातचीत करने के लिए 9 व 10 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की विशेष समिति उदयपुर के दौरा कर रही है। लेकिन इस अहम दौरे के समय एक वैज्ञानिक शोध ने झीलों की नगरी में अरावली की चोटियों पर चल रहे कंक्रीट के अवैध निर्माणों की पोल खोल दी। सैटेलाइट इमेजरी आधारित इस अध्ययन ने साबित किया कि यूडीए क्षेत्र के नो-कंस्ट्रक्शन जोन यानी अरावली की चोटियों और संवेदनशील ढलानों पर धड़ल्ले से सैकड़ों निजी होटल, रिसॉर्ट और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स खड़े किए जा चुके हैं।

 

आपको बता दें कि मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की डॉ. सीमा जालान और इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक दंडबाथुला गिरिबाबू के इस शोध ने बिल्डर्स और प्रशासनिक तंत्र की मिलीभगत को उजागर करने के साथ ही यह भी दिखाया कि कैसे नीतिगत खामियों का फायदा उठाकर झीलों को कैचमेंट देने वाली पहाड़ियों को काटा गया। राजस्थान हाईकोर्ट के कड़े रुख और सुप्रीम कोर्ट समिति के आगमन के बीच यह रिपोर्ट प्रशासन के लिए आईना साबित हो रही है।

 

आपको बता दें कि साल 2010 में उदयपुर में पर्यटकों की संख्या लगभग साढ़े सात लाख थी, जो 2024 में उछलकर साढ़े अठ्ठारह लाख तक पहुंच गई। इस शहर में अब पर्यटकों के लिए करीब 850 संपत्तियां मौजूद हैं, जिनमें 30 फाइव स्टार होटल और 80 रिसॉर्ट शामिल हैं। दूसरी ओर, यूडीए का क्षेत्रफल जो 1999-2012 तक 350.9 वर्ग किमी था, वह 30% बढ़कर 2024 में 457 वर्ग किमी हो गया है। आबादी भी 4.7 लाख से बढ़कर 7 लाख तक पहुंच गई। इसी दबाव की आड़ में पहाड़ियों पर अतिक्रमण हुआ।

 

शोधकर्ताओं ने साल 1972 के कोरोना सैटेलाइट के ऐतिहासिक डेटा की तुलना 2024 की आधुनिक सैटेलाइट तस्वीरों से की, जिसके निष्कर्ष बेहद चौंकाने वाले हैं। अरावली की पहाड़ियों का सबसे तेज और विनाशकारी क्षरण साल 2014 के बाद हुआ है। कुल संवेदनशील निर्माणों में से 50 प्रतिशत का निर्माण साल 2017 के बाद हुआ। साल 2023-24 के दौरान पहाड़ियों पर 40 बड़े नए प्रोजेक्ट्स खड़े हो गए। रिसर्च के दौरान यूडीए क्षेत्र की पहाड़ियों और तलहटी में 160 निर्माणों का अध्ययन किया गया। सरकारी और ऐतिहासिक धरोहर को हटा दें तो इनमें से 144 विशुद्ध रूप से निजी निर्माण हैं।

 

आपको बता दें कि राजस्थान उच्च न्यायालय की जोधपुर पीठ ने 9 मई 2024 को झील संरक्षण समिति बनाम राजस्थान सरकार मामले में आदेश दिया था कि पहाड़ियों के सटीक सीमांकन के लिए तकनीक आधारित विकल्पों का उपयोग किया जाए। सुप्रीम कोर्ट कमेटी भी इसी तकनीकी सुदृढ़ता की पड़ताल कर रही है।

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