सिरोही: एक ही परिवार के तीन भाई-बहन बने आरएएस अधिकारी, रचा इतिहास

Edited By Anil Jangid, Updated: 19 Apr, 2026 07:44 PM

three siblings from sirohi become ras officers creating history in rajasthan

सिरोही। राजस्थान के सिरोही जिले के झाड़ोली गांव से एक प्रेरणादायक और अनोखी सफलता की कहानी सामने आई है, जहां एक ही परिवार के तीन सगे भाई-बहन ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि...

सिरोही। राजस्थान के सिरोही जिले के झाड़ोली गांव से एक प्रेरणादायक और अनोखी सफलता की कहानी सामने आई है, जहां एक ही परिवार के तीन सगे भाई-बहन ने राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस) परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है। तीनों भाई-बहनों के चयन ने क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल बना दिया है।

 

तीनों भाई-बहनों ने हासिल की शानदार रैंक:
परिवार के सबसे छोटे भाई परमवीर सिंह ने आरएएस परीक्षा में 24वीं रैंक हासिल की है। वहीं, बहन सेजल कुंवर ने 120वीं रैंक और बड़े भाई महिपाल सिंह ने 931वीं रैंक प्राप्त की है। जिले में संभवतः यह पहला अवसर है, जब एक ही परिवार के तीन सदस्य एक साथ आरएएस में चयनित हुए हैं, जो अपने आप में एक मिसाल है।

 

पहले भी चयनित, फिर भी नहीं रुके प्रयास:
परमवीर सिंह और सेजल कुंवर का पहले भी आरएएस में चयन हो चुका था। परमवीर ने 2023 में पहले प्रयास में 66वीं रैंक प्राप्त कर डीएसपी पद हासिल किया और वर्तमान में जयपुर स्थित ओटीएस में प्रशिक्षण ले रहे हैं। वहीं, सेजल ने दूसरे प्रयास में 522वीं रैंक प्राप्त कर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में प्रवर्तन निरीक्षक का पद हासिल किया और फिलहाल जोधपुर में कार्यरत हैं। दोनों ने बेहतर रैंक के लक्ष्य के साथ दोबारा परीक्षा दी और इस बार सफलता प्राप्त की।

 

तीसरे प्रयास में महिपाल को मिली सफलता:
परिवार के बड़े बेटे महिपाल सिंह ने पहले प्रयासों में चयन से वंचित रहने के बाद तीसरे प्रयास में सफलता प्राप्त की। उनकी सफलता यह सिद्ध करती है कि मेहनत और धैर्य से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

 

घर पर रहकर की तैयारी, परिवार का मिला सहयोग:
तीनों भाई-बहनों के पिता लालसिंह, सिरोही जिले के राजपुरा बालदा गांव में द्वितीय श्रेणी शिक्षक हैं, जबकि मां गृहिणी हैं। पिता का कहना है कि बच्चों ने घर पर ही नियमित अध्ययन और अनुशासन के साथ तैयारी की। परिवार के सहयोग और बच्चों की मेहनत ने इस सफलता को संभव बनाया।

 

प्रशासनिक सेवा में जाकर करना चाहते हैं समाज सेवा:
तीनों का लक्ष्य शुरू से ही प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए काम करना था। उनके मामा और आयुर्वेद चिकित्साधिकारी उदय प्रताप सिंह ने बताया कि इसी उद्देश्य से उन्होंने लगातार मेहनत की और आज यह सफलता हासिल की।

 

गांव में जश्न का माहौल:
तीनों भाई-बहनों के एक साथ चयन से झाड़ोली गांव में उत्सव जैसा माहौल है। ग्रामीण और रिश्तेदार लगातार उन्हें बधाई दे रहे हैं। यह सफलता क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है, और यह संदेश देती है कि मेहनत, लगन और समर्पण से हर सपना साकार किया जा सकता है।

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