जातीय आधार पर लिया गया फैसला थार की परंपरा के विरुद्ध- हरीश चौधरी

Edited By Afjal Khan, Updated: 05 Jan, 2026 03:50 PM

the decision based on caste is against the traditions of thar  harish chaudhary

बायतु विधायक एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता हरीश चौधरी ने जिले के पुनर्गठन और क्षेत्रीय बदलावों को लेकर जातीय आधार पर निर्णय लिए जाने पर गंभीर आपत्ति दर्ज करवाई।

बायतु विधायक एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता हरीश चौधरी ने जिले के पुनर्गठन और क्षेत्रीय बदलावों को लेकर जातीय आधार पर निर्णय लिए जाने पर गंभीर आपत्ति दर्ज करवाई। 

हरीश चौधरी ने कहा कि जातीय आधार पर लिया गया यह फैसला न तो थार की परंपरा है और न ही बाड़मेर जिले की संस्कृति। थार की पहचान सामाजिक समरसता, भाईचारे और साझी विरासत से रही है, लेकिन इस निर्णय में नियमों, परंपराओं और जनभावनाओं को पूरी तरह कुचल दिया गया है। भाई से पहले पड़ोसी को मानते है उनका कद्र आदर करते है यह थार की पहचान रही है। 

वहीं हरीश चौधरी ने सवाल उठाते हुए कहा कि धोरीमन्ना और गुड़ामालानी क्षेत्रों में मंत्री श्री के.के. विश्नोई सार्वजनिक रूप से यह श्रेय ले रहे हैं कि यह फैसला उन्होंने करवाया है। यह फैसला सही है या गलत है इसका अंतिम निर्णय सत्ता नहीं, बल्कि आने वाले समय में जनता करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस निर्णय को लेकर धोरीमन्ना क्षेत्र की जनता में भारी असंतोष है। “धोरीमन्ना की जनता इस फैसले को स्वीकार नहीं कर रही है। इसी कारण वहां जनता धरने पर बैठी है। हरीश चौधरी ने आगे कहा कि जनता के इस लोकतांत्रिक विरोध में वे स्वयं भी शामिल हैं “पूर्व मंत्री श्री हेमाराम चौधरी और मैं स्वयं जनता के साथ धरने पर बैठे हैं। यह आंदोलन किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि जनसम्मान और जनभावनाओं की रक्षा के लिए है।

उन्होंने दो टूक कहा कि “जनता की सहमति और विश्वास के बिना लिया गया कोई भी फैसला टिकाऊ नहीं हो सकता। थार की धरती ऐसे निर्णयों को न पहले स्वीकार करती थी और न आगे करेगी।”

 दरअसल राजस्थान सरकार का 31 दिसंबर की डेट का एक नोटिफिकेशन 2 जनवरी की रात को सामने आया। इसमें बाड़मेर और बालोतरा जिले का पुनर्गठन कर सीमाएं बदल दी गई। बाड़मेर से धोरीमन्ना और गुड़ामालानी को नए जिले बालोतरा में शामिल कर दिया। वहीं बायतु को फिर से बाड़मेर जिले में ले लिया गया। और इसके बाद से आप देखिए कि सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक इस नोटिफिकेशन का हर तरफ विरोध हो रहा है। बाड़मेर में कांग्रेस धरने पर है। पूर्व मंत्री हेमाराम चौधरी और विधायक हरीश चौधरी इस फैसले का जमकर विरोध कर रहे है।

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