Edited By Ishika Jain, Updated: 18 Jun, 2026 04:39 PM

शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर उत्पन्न स्थिति के विरोध में गुरुवार को दौसा जिला मुख्यालय पर अखिल राजस्थान शैक्षिक महासंघ के बैनर तले शिक्षकों ने रैली निकालकर प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भेजते हुए वर्ष...
दौसा। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर उत्पन्न स्थिति के विरोध में गुरुवार को दौसा जिला मुख्यालय पर अखिल राजस्थान शैक्षिक महासंघ के बैनर तले शिक्षकों ने रैली निकालकर प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भेजते हुए वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी छूट देने की मांग उठाई।
जिलाध्यक्ष अवधेश कुमार के नेतृत्व में आयोजित प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा 23 अगस्त 2010 को जारी अधिसूचना और हाल ही में आए न्यायिक फैसलों के बाद देशभर में बड़ी संख्या में शिक्षकों के बीच भविष्य को लेकर चिंता का माहौल है।
महासंघ का कहना है कि वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों की भर्ती उस समय लागू नियमों और पात्रता मानकों के अनुसार हुई थी। ऐसे में बाद में लागू की गई शर्तों को पूर्व प्रभाव से लागू करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।
ज्ञापन में केंद्र सरकार से मांग की गई कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी राहत प्रदान की जाए। साथ ही उनकी सेवा सुरक्षा, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य सेवा संबंधी लाभों को यथावत बनाए रखा जाए।
संगठन ने कहा कि लंबे समय से शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों के अनुभव और योगदान को देखते हुए उनके अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए। शिक्षकों के भविष्य को अनिश्चितता में छोड़ना शिक्षा व्यवस्था के लिए भी उचित नहीं होगा।
महासंघ ने आवश्यकता पड़ने पर संसद में विशेष प्रावधान या विधायी संशोधन कर प्रभावित शिक्षकों को राहत देने की मांग भी रखी। साथ ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों के बीच फैली असमंजस की स्थिति को समाप्त करने का आग्रह किया गया।
प्रदर्शन के दौरान संगठन के कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लेते हुए शिक्षकों के हितों की रक्षा करेगी।