फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र से सरकारी नौकरी पाने वाले जालसाज शिक्षक को SOG और पुलिस ने गिरफ्तार

Edited By Anil Jangid, Updated: 04 Jun, 2026 05:42 PM

teacher arrested obtaining govt job using fake disability certificate jhalawar

झालावाड़। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG), जयपुर और झालावाड़ पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले शिक्षक को गिरफ्तार करने में सफलता मिली। आरोपी शिक्षक पिछले 12 वर्षों से राज्य सेवा में कार्यरत था।

झालावाड़। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG), जयपुर और झालावाड़ पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी पाने वाले शिक्षक को गिरफ्तार करने में सफलता मिली। आरोपी शिक्षक पिछले 12 वर्षों से राज्य सेवा में कार्यरत था।

 

जिला पुलिस अधीक्षक झालावाड़ ने बताया कि पुलिस को फर्जी दिव्यांग प्रमाण-पत्र के सहारे सरकारी नौकरी कर रहे कार्मिकों के संबंध में गोपनीय परिवाद प्राप्त हुए। इन परिवादों की जांच आरपीएस प्रोबेशनर श्री कृष्ण गोपाल के निर्देशन में की गई। जांच के दौरान एसओजी जयपुर से प्राप्त गोपनीय परिवादों के साथ बायोमीट्रिक सत्यापन और एम.बी.एस. अस्पताल मेडिकल कॉलेज, कोटा द्वारा गठित विशेष मेडिकल बोर्ड की सहायता से आरोपी शिक्षक की दिव्यांगता की पुनः जाँच करवाई गई।

 

जांच में पाया गया कि नियमानुसार विकलांग कोटे का लाभ लेने के लिए न्यूनतम 40 प्रतिशत दिव्यांगता होना आवश्यक है। लेकिन आरोपी बनेसिंह की दिव्यांगता केवल 6 प्रतिशत और योगेश कुमार की शून्य प्रतिशत पाई गई। इस प्रकार दोनों कार्मिक दिव्यांग कोटे के लिए अपात्र पाए गए।

 

जांच रिपोर्ट एसओजी को भेजी गई और उसके आधार पर पुलिस थाना कोतवाली में प्रकरण संख्या 307/2026 दर्ज कर अनुसंधान आरंभ किया गया। अनुसंधान अधिकारी श्री कमल कुमार मीणा, आरपीएस प्रोबेशनर ने आरोपी के चिकित्सा विभाग से जारी मूल प्रमाण-पत्र, राजस्थान लोक सेवा आयोग एवं कर्मचारी चयन बोर्ड में आवेदन, प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम और नियुक्ति के समय विद्यालय में प्रस्तुत दस्तावेज़ की विस्तृत जांच की।

 

जिला पुलिस ने बताया कि इस कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी नौकरियों में दिव्यांगता कोटे का दुरुपयोग रोकना और न्याय सुनिश्चित करना है। अधिकारियों ने कहा कि यदि इस प्रकार की धोखाधड़ी को समय पर पकड़ा न गया, तो इससे सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और न्याय व्यवस्था प्रभावित हो सकती थी।

 

यह कार्रवाई SOG और स्थानीय पुलिस की समन्वित जांच की बड़ी सफलता मानी जा रही है और भविष्य में ऐसे मामलों के प्रति सतर्कता बढ़ाने का संदेश देती है।

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