सूरतगढ़ न्यायालय का सख्त आदेश: थानाधिकारी समेत तीन पुलिस अधिकारियों पर 1.20 लाख रुपये का अर्थदंड

Edited By Anil Jangid, Updated: 03 Jun, 2026 06:12 PM

suratgarh court imposes rs 1 20 lakh penalty on sho and three police officers

सूरतगढ़: अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सूरतगढ़ ने एक महत्वपूर्ण मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए न्यायालय के आदेशों की पालना नहीं करने पर शहर थानाधिकारी दिनेश सहारण सहित तीन पुलिस अधिकारियों पर कुल 1 लाख 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। यह आदेश...

सूरतगढ़: अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सूरतगढ़ ने एक महत्वपूर्ण मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए न्यायालय के आदेशों की पालना नहीं करने पर शहर थानाधिकारी दिनेश सहारण सहित तीन पुलिस अधिकारियों पर कुल 1 लाख 20 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। यह आदेश परिवादी रामकृष्ण जाखड़ बनाम दिनेश सहारण एवं अन्य प्रकरण में पारित किया गया।

 

न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने समय पर एफआईआर दर्ज नहीं की, जबकि वे न्यायालय के आदेशों का पालन करने के लिए विधिक रूप से बाध्य थे। इस पर अदालत ने संबंधित अधिकारियों पर व्यक्तिगत रूप से 40-40 हजार रुपये की कॉस्ट अधिरोपित करते हुए कुल 1.20 लाख रुपये की राशि तालुका विधिक सेवा समिति, सूरतगढ़ में जमा कराने के निर्देश दिए हैं।

 

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि 15 दिनों के भीतर राशि जमा नहीं करवाई गई तो जिला पुलिस अधीक्षक, श्रीगंगानगर द्वारा नियमानुसार वसूली की जाएगी। इसके बाद भी आदेश की पालना नहीं होने पर न्यायालय इसे अवमानना मानते हुए जुर्माने की तरह वसूली की कार्रवाई कर सकता है।

 

न्यायालय ने वृत्ताधिकारी सूरतगढ़ और जिला पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर को निर्देश दिया है कि 8 मई 2026 के मूल आदेश की पालना करते हुए दो दिनों के भीतर एफआईआर दर्ज की जाए। साथ ही मामले में नामजद पुलिसकर्मियों को ऐसे स्थान पर स्थानांतरित किया जाए जहां वे परिवादी या गवाहों को प्रभावित नहीं कर सकें। अदालत ने यह भी कहा कि जांच पूरी होने तक संबंधित पुलिसकर्मियों को फील्ड ड्यूटी से दूर रखना न्यायहित में होगा।

 

मामले से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए भी न्यायालय ने विशेष निर्देश जारी किए हैं। जिला पुलिस अधीक्षक को सभी डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य एकत्रित कर सुरक्षित रखने तथा 15 दिनों के भीतर न्यायालय में पालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।

 

अदालत ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी आदेशों की अनदेखी की गई तो जिला पुलिस अधीक्षक सहित राजस्थान पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में तलब किया जा सकता है।

 

इसके अलावा न्यायालय ने आदेश की प्रति राजस्थान पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को भेजते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एक माह के भीतर विभागीय कार्रवाई करने की अनुशंसा की है। मामले की अगली सुनवाई और पालना रिपोर्ट के लिए 24 जून 2026 की तिथि निर्धारित की गई है।

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