Edited By Anil Jangid, Updated: 21 May, 2026 02:46 PM

जोधपुर: जोधपुर के केरू अस्पताल में एक ऐसा दुर्लभ और चमत्कारिक प्रसव हुआ है, जिसने न केवल चिकित्सा जगत को हैरान किया है बल्कि पूरे मारवाड़ क्षेत्र में खुशी और उत्सुकता का माहौल बना दिया है। 32 वर्षीय लीला देवी, जो जोधपुर के घंटियाली गांव की रहने वाली...
जोधपुर: जोधपुर के केरू अस्पताल में एक ऐसा दुर्लभ और चमत्कारिक प्रसव हुआ है, जिसने न केवल चिकित्सा जगत को हैरान किया है बल्कि पूरे मारवाड़ क्षेत्र में खुशी और उत्सुकता का माहौल बना दिया है। 32 वर्षीय लीला देवी, जो जोधपुर के घंटियाली गांव की रहने वाली हैं, ने हाल ही में 5 किलो 200 ग्राम वजन की बच्ची को जन्म दिया। यह वजन सामान्य नवजात शिशुओं के दोगुने से अधिक है और चिकित्सा विज्ञान में इसे 'मैक्रोसोमिया' कहा जाता है।
सामान्यतः भारत में नवजात का औसत जन्म वजन 2.5 से 3.5 किलो के बीच होता है। 4 किलो या उससे अधिक वजन वाले बच्चे का जन्म जोखिम भरा माना जाता है, खासकर ग्रामीण स्तर के सरकारी अस्पतालों में। लेकिन केरू अस्पताल की डॉक्टरों की टीम ने पूरी सावधानी और अनुभव के साथ यह चुनौतीपूर्ण प्रसव सफलतापूर्वक संपन्न किया।
इस अद्भुत प्रसव में ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुरेश सैनी, डॉ. कविता चौधरी, डॉ. महेश भार्गव, डॉ. विशाल दाधीच, डॉ. दिशा और रंजीत सिंह चौधरी की अहम भूमिका रही। उनकी सूझबूझ और तत्परता के कारण मां और बच्ची दोनों स्वस्थ और सुरक्षित हैं।
जैसे ही यह खबर अस्पताल में फैली, कर्मचारियों, परिजनों और ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोग इस 'वंडर बेबी' को देखने के लिए अस्पताल पहुंचे और प्रसन्नता जाहिर की। ग्रामीण इसे ईश्वर की देन और लक्ष्मी का रूप मान रहे हैं।
यह प्रसव यह भी दर्शाता है कि ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र, सही संसाधन और सक्षम डॉक्टरों के माध्यम से जटिल मामलों को भी सफलता पूर्वक संभाला जा सकता है। केरू अस्पताल की यह उपलब्धि ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूती और डॉक्टरों की निष्ठा की मिसाल है।
मां-बेटी दोनों की स्थिति स्थिर है और अस्पताल ने सभी स्वास्थ्य जांचों के बाद परिजनों को घर जाने की अनुमति दी। इस चमत्कारिक प्रसव ने न केवल जोधपुर में बल्कि पूरे राजस्थान में चिकित्सा और समाज के क्षेत्र में गर्व का विषय पैदा कर दिया है।