अरावली को बचाने के लिए प्ले कार्ड्स के साथ मौन विरोध

Edited By Kuldeep Kundara, Updated: 25 Dec, 2025 02:31 PM

silent protest with placards to save the aravalli hills

अरावली पर्वत श्रृंखला पर सरकार के रवैये और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का आज बड़ी संख्या में जयपुर के नागरिकों ने सेन्ट्रल पार्क में प्ले कार्ड्स के साथ मौन विरोध किया

जयपुर  । अरावली पर्वत श्रृंखला पर सरकार के रवैये और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का आज बड़ी संख्या में जयपुर के नागरिकों ने सेन्ट्रल पार्क में प्ले कार्ड्स के साथ मौन विरोध किया। भारत सेवा संस्थान के सचिव और राज्य के पूर्व महाधिवक्ता जीएस बापना की अगुवाई में जुटे इन लोगों का पार्क में घूमने आने वाले लोगों ने भी साथ दिया। अनेक स्वयं प्ले कार्ड्स लेकर साथ खड़े हो गए तो बड़ी संख्या में लोगों ने मौखिक तौर पर मुद्दे को अपना समर्थन दिया। कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने केन्द्र सरकार की ओर से नये खनन पट्टों पर रोक का जिक्र किया।

बापना और अन्य ने उन्हें बताया कि इस आदेश का तब तक कोई अर्थ नहीं है जब तक कि सुप्रीम कोर्ट 20 नवम्बर के अपने आदेश में सुधार कर 100 मीटर तक की श्रृंखला को भी अरावली घोषित नहीं कर दे। बापना ने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो राजस्थान सहित 4 राज्यों की लाइफ लाइन अरावली ही नहीं उजड़ेगी, इस संपूर्ण क्षेत्र से जल, जंगल, जीवन, पेड़ पौधे, जीव जन्तु, वन्य जीव,पर्यटन स्थल, मन्दिर, किले, महल सब समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि 20 प्रतिशत अरावली पर्वत तो पहले ही खनन की भेंट चढ़ चुका है।

यदि खनन को और गति दी गई तो अरावली विलुप्त हो जायेगी और जेन-z और आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी। इस अवसर पर बापना के साथ धर्मवीर कटेवा, हनुमान नायला, पूनमचंद भंडारी, विजय सिंह पूनिया, पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता डॉ. गणेश परिहार एवं आर के यादव, कुसुम जैन, ललिता मेहरवाल, बीना कुमारी, संत कुमार जैन, विनय बापना, महेन्द्र गहलोत और शेर सिंह महला भी मौजूद थे।
 

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