खेजड़ी की राख में छिपा पर्यावरणीय अपराध: शिव विधायक भाटी का सोलर कंपनियों पर तीखा प्रहार

Edited By Chandra Prakash, Updated: 03 Aug, 2025 07:37 PM

shiv mla bhati s sharp attack on solar companies

बरियाड़ा और खोडाल गांव के ग्रामीणों द्वारा सोलर कंपनियों की ओर से की जा रही खेजड़ी जैसे पर्यावरण रक्षक वृक्षों की अवैध कटाई एवं अन्य गैरकानूनी गतिविधियों की शिकायत पर शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने इस गंभीर प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए शनिवार को...


शिव/ बाड़मेर, 3 अगस्त 2025 | बरियाड़ा और खोडाल गांव के ग्रामीणों द्वारा सोलर कंपनियों की ओर से की जा रही खेजड़ी जैसे पर्यावरण रक्षक वृक्षों की अवैध कटाई एवं अन्य गैरकानूनी गतिविधियों की शिकायत पर शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने इस गंभीर प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए शनिवार को समस्त ग्रामीणों के साथ उपखंड अधिकारी कार्यालय, शिव पहुँचे। उन्होंने इस मुद्दे पर प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए दोषियों के विरुद्ध तत्काल और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए।

हालांकि जैसे ही सोलर कंपनियों के अधिकारियों को जानकारी मिली कि विधायक, प्रशासनिक दल और ग्रामीण रविवार सुबह स्थल निरीक्षण पर पहुँचने वाले हैं, उन्होंने सबूत मिटाने की नियत से रात के अंधेरे में पहले से काटे गए खेजड़ी एवं अन्य वृक्षों को आग के हवाले कर दिया। यह न केवल एक सुनियोजित आपराधिक कृत्य है, बल्कि प्रदेश की पर्यावरणीय सुरक्षा, प्रशासनिक व्यवस्था और कानून के शासन को खुली चुनौती है।

इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक भाटी ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, “यह अत्यंत निंदनीय और शर्मनाक है कि कुछ सोलर कंपनियाँ मुनाफे की हवस में खुलेआम कानून को रौंद रही हैं और प्रदेश की जैव विविधता के साथ क्रूर मज़ाक कर रही हैं। खेजड़ी जैसे वृक्ष न केवल राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान हैं, बल्कि थार के पर्यावरण संतुलन के लिए अनिवार्य हैं। इस अपराध को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

रविवार को विधायक भाटी एक बार फिर समस्त ग्रामवासियों के साथ मौके पर पहुँचे और कंपनी प्रबंधन के खिलाफ धरने पर बैठे। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने इस पर ठोस कार्रवाई नहीं की, तो इस मुद्दे को उच्च स्तर तक उठाया जाएगा।

यह मामला केवल पर्यावरणीय अपराध नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की प्रभावशीलता की भी अग्निपरीक्षा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस घोर अपराध के विरुद्ध कितनी तत्परता से कार्यवाही करता है और खेजड़ी के नाम पर जलाए गए सबूतों की राख से न्याय की चिंगारी कितनी तेज़ उठती है।

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