काव्य वही श्रेष्ठ जो राष्ट्र की उन्नति में सहायक हो: प्रो. नंदकिशोर पांडेय, कानोड़िया कॉलेज में ‘शब्द रसायन’ का पहला आयोजन

Edited By Sourabh Dubey, Updated: 09 Sep, 2026 07:28 PM

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वैचारिक विमर्श को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नवगठित ‘शब्द रसायन’ संस्थान का पहला आयोजन बुधवार को जयपुर स्थित कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय के भाषा सभागार में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और मां शारदे की वंदना के साथ हुई।

जयपुर। वैचारिक विमर्श को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नवगठित ‘शब्द रसायन’ संस्थान का पहला आयोजन बुधवार को जयपुर स्थित कानोड़िया पीजी महिला महाविद्यालय के भाषा सभागार में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और मां शारदे की वंदना के साथ हुई। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. सीमा अग्रवाल ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।

कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक डॉ. रेवंत दान ने ‘शब्द रसायन’ की संकल्पना और उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भविष्य में संस्थान के माध्यम से साहित्य, शिक्षा, राजनीति, सिनेमा, पत्रकारिता, उद्योग, विज्ञान, खेल और व्यापार जगत से जुड़े समसामयिक विषयों पर विभिन्न वैचारिक विमर्श आयोजित किए जाएंगे।

संस्थान के सचिव मुरारी गुप्ता ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान स्वरचित काव्यपाठ प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें छात्राओं ने सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और संयुक्त परिवार जैसे विषयों पर अपनी स्वरचित कविताओं की प्रस्तुति दी।

प्रतियोगिता में जाह्नवी मंडल ने प्रथम, तेजस्वी सहारिया ने द्वितीय और सीपिका लवानिया ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेता प्रतिभागियों को स्मृति चिह्न और प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

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    ‘संवेदनशील व्यक्ति के भीतर कविता का प्रस्फुटन होता है’

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. नंदकिशोर पांडेय ने विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति संवेदनशील होता है, उसके भीतर कविता का प्रस्फुटन होता है। कवि वाल्मीकि, पंत और कालिदास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि नैसर्गिक कवि अपनी गहरी संवेदना से प्रेरित होकर काव्य की रचना करते हैं।

    प्रो. पांडेय ने कहा, “काव्य और कला वही श्रेष्ठ है जो समाज और राष्ट्र की उन्नति में सहायक हो तथा सामाजिक समरसता का संचार करे।”

    उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन की सार्थकता का संदेश देते हुए कहा कि जीवन को सफल बनाने से अधिक महत्वपूर्ण उसे सार्थक बनाना है। उन्होंने भारतीय और पश्चिमी संस्कृति के प्रकृति के प्रति दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां पश्चिमी संस्कृति में सृष्टि को मनुष्य के उपभोग के लिए बताया गया, वहीं भारतीय दृष्टि ने करुणा के साथ यह सिखाया कि प्रकृति समस्त प्राणियों के लिए है।

    विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर

    प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल की सदस्य डॉ. रेखा गुप्ता ने सभी प्रतिभागियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को महाविद्यालय की नियमित पढ़ाई के साथ-साथ अपने व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए सह-शैक्षणिक गतिविधियों में भी उत्साहपूर्वक भाग लेना चाहिए।

    कार्यक्रम का संचालन कशिश गौड़ ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शीताभ शर्मा ने किया। आयोजन के माध्यम से छात्राओं को साहित्यिक अभिव्यक्ति के साथ-साथ सामाजिक और राष्ट्रीय विषयों पर अपने विचार रखने का अवसर मिला।

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