आरजीएचएस में निजी अस्पतालों की अनियमितता उजागर, 50 अस्पताल जांच के घेरे में

Edited By Sourabh Dubey, Updated: 21 Aug, 2026 06:04 PM

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RGHS में निजी अस्पतालों की अनियमितता सामने आई। 238 लाभार्थियों से जुड़े 479 मामले मिले, करीब 50 अस्पताल और 60 चिकित्सक जांच के दायरे में हैं।

जयपुर। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में निजी अस्पतालों की कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरजीएचएस के सतत डेटा विश्लेषण के दौरान ऐसे प्रकरण सामने आए हैं, जिनमें ₹2,000 से अधिक लागत वाली जांचों के लिए लागू प्री-ऑथराइजेशन व्यवस्था से बचने के लिए मरीजों को एक ही बीमारी के इलाज के दौरान 3 से 4 बार अस्पताल बुलाकर अलग-अलग जांचें कराई गईं।

प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य श्रीमती गायत्री राठौड़ ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आशंका है कि अधिक क्लेम प्राप्त करने के उद्देश्य से जांचों और दावों को अलग-अलग किया गया। एक माह के डेटा विश्लेषण में 238 लाभार्थियों से जुड़े 479 प्रकरण सामने आए हैं।

करीब 50 अस्पताल और 60 चिकित्सक जांच के दायरे में

इन मामलों में प्रदेश के करीब 50 निजी अस्पतालों और 60 चिकित्सकों की भूमिका जांच के दायरे में आई है। सबसे अधिक मामले जोधपुर, जयपुर, उदयपुर और अलवर से सामने आए हैं। आरजीएचएस की ओर से सभी प्रकरणों की विस्तृत जांच की जा रही है।

आरजीएचएस की परियोजना अधिकारी डॉ. निधि पटेल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि जांचों को अलग-अलग कराने के कारण मरीजों को अनावश्यक रूप से बार-बार अस्पताल आना पड़ा। इनमें महिलाएं और बुजुर्ग मरीज भी शामिल हैं।

प्री-ऑथराइजेशन से बचने का शक

₹2,000 से अधिक लागत वाली जांचों के लिए लागू प्री-ऑथराइजेशन व्यवस्था का उद्देश्य महंगी जांचों पर निगरानी और योजना में पारदर्शिता बनाए रखना है। हालांकि, सामने आए मामलों में आशंका है कि कुछ अस्पतालों ने जांचों को अलग-अलग कराकर इस व्यवस्था से बचने का प्रयास किया।

यदि विस्तृत जांच में किसी अस्पताल या चिकित्सक द्वारा अधिक क्लेम हासिल करने अथवा प्री-ऑथराइजेशन से बचने के लिए जानबूझकर जांचों या दावों को विभाजित करना साबित होता है, तो संबंधित दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मरीजों की परेशानी और सरकारी धन की सुरक्षा पर फोकस

आरजीएचएस का उद्देश्य लाभार्थियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें अनावश्यक जांच और अस्पताल के चक्कर से बचाना है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजना के तहत किसी भी प्रकार की अनियमितता या सरकारी धन के संभावित दुरुपयोग को गंभीरता से लिया जाएगा।

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