संसाधनों की कमी नहीं, पक्का इरादा तय करता है सफलता: भगवती बल्दवा

Edited By Anil Jangid, Updated: 21 Mar, 2026 12:58 PM

resources are not barrier determination defines success bhagwati baldwa

जयपुर। आधुनिक भारत के नवनिर्माण में महिला नेतृत्व की अनिवार्य भूमिका को रेखांकित करने और देश के युवाओं में स्वरोजगार व उद्यमिता की एक नई अलख जगाने के उद्देश्य से जेइसीआरसी यूनिवर्सिटी में एक विशेष आयोजन किया गया। यूनिवर्सिटी के नेशनल सर्विस स्कीम...

जयपुर। आधुनिक भारत के नवनिर्माण में महिला नेतृत्व की अनिवार्य भूमिका को रेखांकित करने और देश के युवाओं में स्वरोजगार व उद्यमिता की एक नई अलख जगाने के उद्देश्य से जेइसीआरसी यूनिवर्सिटी में एक विशेष आयोजन किया गया। यूनिवर्सिटी के नेशनल सर्विस स्कीम (एनएसएस) और जेइसीआरसी 90.8 एफएम के संयुक्त तत्वावधान में 'फ्रॉम डेजर्ट सैंड्स टू ग्लोबल स्टैंड्स - वुमन लीडिंग द वर्ल्ड ऑफ बिजनेस' थीम पर एक मेगा मोटिवेशनल टॉक का आयोजन हुआ। 

 

सैकड़ों विद्यार्थियों के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार किया
इस कार्यक्रम ने न केवल उपस्थित सैकड़ों विद्यार्थियों के भीतर एक नई ऊर्जा का संचार किया, बल्कि उन्हें अपनी स्थानीय जड़ों से जुड़कर ग्लोबल लेवल पर अपनी एक अमिट पहचान बनाने के लिए भी गहराई से प्रेरित किया। कार्यक्रम में इक्सोरियल और कार्तिकेय ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज की चेयरपर्सन एवं उद्योगपति भगवती बल्दवा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। और युवाओं के साथ सफलता के वे मूल मंत्र साझा किए, जो किताबी ज्ञान से परे ज़मीनी हकीकत और उनके जीवन के कड़े अनुभवों पर आधारित थे। 

 

संसाधनों की कमी कभी राह का रोड़ा नहीं बन सकती
उन्होंने छात्रों को जीवन में हमेशा बड़ा सोचने, छोटी शुरुआत करने और बिना समय गंवाए तुरंत फैसले लेने का मंत्र दिया। युवाओं की उस आम शिकायत का जवाब देते हुए कि उनके पास व्यापार शुरू करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, बल्दवा ने स्पष्ट किया, "अगर आपमें खुद पर भरोसा है, आपकी नीयत साफ है और इरादा लोहे की तरह पक्का है, तो संसाधनों की कमी कभी आपकी राह का रोड़ा नहीं बन सकती। संसाधन जुटाए जा सकते हैं, लेकिन जुनून आपके भीतर से ही आना चाहिए।" अपने उद्बोधन में एक बेहद भावुक और प्रेरणादायक पहलू जोड़ते हुए भगवती बल्दवा ने अपनी जड़ों को याद किया। उन्होंने कहा, "राजस्थान केवल एक राज्य का नाम नहीं है; यह एक जीवंत संस्कृति, एक अडिग साहस और एक ऐसी अमिट पहचान है, जो हमारे खून में बहती है। आज भी मुझे उस माटी की याद सबसे ज्यादा आती है जिसने मुझे गढ़ा है।" 

 

अपनी जड़ों को कभी मत छोड़ो
छात्रों को अपने संस्कारों और परिवार के महत्व के प्रति सचेत करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीडूंगरगढ़ में बिताए बचपन और युवावस्था के दिन आज भी उनके भीतर नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ने का जुनून जगाते हैं। "उन गलियों ने मुझे जीवन की सबसे बड़ी सीख दी—चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, अपने संस्कारों, अपने परिवार, अपने समाज और अपनी जड़ों को कभी मत छोड़ो।" 

 

राजस्थान सोलर स्टेट बन चुका है
युवाओं को राजस्थान के भविष्य की तस्वीर दिखाते हुए उन्होंने कहा कि आज का राजस्थान केवल इतिहास और किलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की अपार संभावनाओं का एक विशाल आर्थिक केंद्र बन चुका है। धरती के गर्भ में छिपे ज़िंक, चाँदी, तांबा, पोटाश जैसे खनिजों से लेकर बाड़मेर-जैसलमेर के तेल और गैस भंडार प्रदेश की नई आर्थिक रीढ़ बन रहे हैं। जो तीखी धूप कभी यहाँ की सबसे बड़ी चुनौती थी, वही आज सबसे बड़ी ताकत बन गई है। आज राजस्थान एक सोलर स्टेट बन चुका है और देश को ग्रीन एनर्जी की ओर ले जाने में सबसे आगे हैं। पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने का एक शानदार उदाहरण देते हुए बल्दवा ने अपनी कंपनी इक्सोरियल की यात्रा साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे राजस्थान की कठिन जलवायु ने यहाँ की जड़ी-बूटियों, विशेषकर अश्वगंधा, को एक अद्वितीय शक्ति और गुणवत्ता दी है। 

 

एक सच्चा लीडर वही जो टीम वर्क को सर्वोपरि रखे
"हमने राजस्थान की उर्वर भूमि और अश्वगंधा की उस शक्ति को पहचाना, जिसकी आज दुनिया को सख्त जरूरत है। पारंपरिक ज्ञान काफी नहीं था, इसलिए हमने भारतीय उत्पादों को एक ठोस वैज्ञानिक और रिसर्च आधारित एप्रोच दी। आज इक्सोरियल के माध्यम से हम इस अनमोल आयुर्वेदिक धरोहर को दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचा रहे हैं। और इस बात का जिक्र प्रधानमंत्री मोदी भी अपने मन की बात कार्यक्रम में कर चुके हैं" उन्होंने युवाओं को समझाया कि एक सच्चा लीडर वह है जो टीम वर्क को सर्वोपरि रखे, सबको साथ लेकर चले और कामयाबी के लिए शॉर्टकट न ढूंढे। लगातार प्रयास, धैर्य, अनुशासन और काम के प्रति ईमानदारी ही आपको शिखर तक ले जाती है।

 

तकनीक कभी अवसर कम नहीं करती
कार्यक्रम में इंडिलिंक्स न्यूज़लैब के फाउंडर मुकेश सैनी ने भविष्य की चुनौतियों, डिजिटल क्रांति और युवाओं की भूमिका पर विचार रखे। सैनी ने छात्रों के भीतर उस डर को खत्म करने का प्रयास किया जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और नई तकनीक को लेकर उनके मन में बसा है। उन्होंने बेहद ऊर्जावान और स्पष्ट लहज़े में कहा कि आज का युवा इस दुविधा में है कि क्या एआई और तकनीक उनके रोज़गार छीन लेंगे? सच्चाई इसके बिल्कुल उलट है। तकनीक कभी आपके अवसर कम नहीं करती, बल्कि वह काम करने के नए, असीमित और ग्लोबल अवसर पैदा करती है।" उन्होंने विस्तार से समझाया कि जो लोग तकनीक को अपना साथी बना लेंगे, वे भविष्य के लीडर होंगे और जो इससे डरेंगे, वे पीछे छूट जाएंगे।

 

युवाओं से एक सीधा संवाद किया
कार्यक्रम में जेइसीआरसी यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपने विचार रखे। यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर (डिजिटल स्ट्रेटेजीज) धीमांत अग्रवाल और रजिस्ट्रार एस.एल. अग्रवाल ने आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डाला। एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. सोनू पारीक (एचओडी- कैमिस्ट्री) और जेइसीआरसी 90.8 एफएम के स्टेशन मैनेजर पंडित अमनदीप (असिस्टेंट प्रोफेसर) ने युवाओं से एक सीधा संवाद किया।

 

सोशल मीडिया की आभासी दुनिया के भ्रम से बाहर निकलें
इन वक्ताओं ने संयुक्त रूप से युवाओं को यह विशेष संदेश दिया कि वे सोशल मीडिया की आभासी दुनिया के भ्रम से बाहर निकलें। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि समाज में नारी के अथक परिश्रम और उनके नेतृत्व का सम्मान करना हमारी पहली जिम्मेदारी है। टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन चाहे कितने भी ऊंचे मुकाम पर पहुँच जाए, लेकिन मानवीय संवेदनाओं, दया और संस्कारों के बिना वह अधूरा है।

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