Edited By Anil Jangid, Updated: 03 Jun, 2026 03:51 PM

सवाईमाधोपुर: मोबाइल फोन पर लगातार रील्स देखने का चलन अब मनोरंजन की सीमा पार कर खतरनाक लत में बदल चुका है। यह आदत बच्चों, किशोरों और युवाओं के मानसिक संतुलन, शारीरिक स्वास्थ्य और सामाजिक रिश्तों पर गंभीर असर डाल रही है।
सवाईमाधोपुर: मोबाइल फोन पर लगातार रील्स देखने का चलन अब मनोरंजन की सीमा पार कर खतरनाक लत में बदल चुका है। यह आदत बच्चों, किशोरों और युवाओं के मानसिक संतुलन, शारीरिक स्वास्थ्य और सामाजिक रिश्तों पर गंभीर असर डाल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार स्क्रीन पर टिके रहने से आंखों की रोशनी कमजोर हो रही है, तनाव और सिरदर्द बढ़ रहे हैं, नींद प्रभावित हो रही है और बच्चों की दिनचर्या पूरी तरह बदल रही है।
मनोचिकित्सक डॉ. गौरव चंद्रवंशी के अनुसार, जिला अस्पताल में प्रतिदिन दो ऐसे केस आ रहे हैं जिनमें रील्स की लत का मानसिक प्रभाव दिखाई दे रहा है। बच्चों और किशोरों की सोचने-समझने की क्षमता कम हो रही है, पढ़ाई से दूरी बढ़ रही है और सामाजिक बातचीत घट रही है। मोबाइल स्क्रीन पर अधिक समय बिताने से शारीरिक गतिविधियां कम हो रही हैं, जिससे मोटापा बढ़ रहा है और खेलकूद जैसी आउटडोर गतिविधियों से बच्चों का विकास प्रभावित हो रहा है।
रील्स की लत के प्रमुख कारणों में ध्यान केन्द्रित करने की क्षमता में कमी, तनाव, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, आंखों की रोशनी पर असर, नींद की समस्या, शारीरिक गतिविधियों की कमी और सामाजिक रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव शामिल हैं। यह समस्या केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक भी बन गई है। परिवारों में संवाद कम हो रहा है और बच्चे मोबाइल पर अधिक समय बिताने के कारण रिश्तों में दूरी और नकारात्मकता बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सरकारी सख्ती से समस्या हल नहीं होगी। अभिभावकों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों को मिलकर बच्चों को सकारात्मक दिशा देनी होगी। बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नजर रखनी चाहिए और उन्हें पढ़ाई, खेल, रचनात्मक गतिविधियों और सामाजिक संवाद के लिए प्रेरित करना चाहिए।
रील्स की लत न केवल मनोरंजन का साधन बनी है, बल्कि यह बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य, शारीरिक विकास और सामाजिक जीवन पर गंभीर खतरा बनती जा रही है। समय रहते जागरूकता और नियंत्रण के कदम उठाने आवश्यक हैं, ताकि यह लत भविष्य में और बड़े संकट का कारण न बने।