Edited By Anil Jangid, Updated: 06 Apr, 2026 02:52 PM

राजसमंद : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा इस वर्ष शुरू की गई कक्षा 10वीं की द्वितीय बोर्ड परीक्षा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। राजस्थान के राजसमंद जिले में कुछ निजी स्कूलों पर आरोप है कि वे इस परीक्षा के नाम पर अभिभावकों से...
राजसमंद : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा इस वर्ष शुरू की गई कक्षा 10वीं की द्वितीय बोर्ड परीक्षा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। राजस्थान के राजसमंद जिले में कुछ निजी स्कूलों पर आरोप है कि वे इस परीक्षा के नाम पर अभिभावकों से अतिरिक्त शुल्क वसूल रहे हैं। जानकारी के अनुसार, इन विद्यालयों द्वारा “लिस्ट ऑफ कैंडिडेट (एलओसी)” भरने के नाम पर छात्रों से तीन महीने की ट्यूशन फीस मांगी जा रही है, जिससे अभिभावकों में नाराजगी बढ़ रही है।
मामले की जानकारी मिलते ही सीबीएसई ने इसे गंभीरता से लिया और संबंधित स्कूलों को सख्त निर्देश जारी किए। 30 मार्च को परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया कि एलओसी जमा करते समय किसी भी प्रकार का अतिरिक्त या अनधिकृत शुल्क लेना पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है। बोर्ड ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि इस तरह की प्रथा को तुरंत बंद नहीं किया गया तो दोषी स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
सीबीएसई ने यह स्पष्ट किया है कि विद्यालय केवल वही परीक्षा शुल्क ले सकते हैं, जो एलओसी परिपत्र में निर्धारित किया गया है। इसके अलावा किसी भी प्रकार की अतिरिक्त फीस वसूली को नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। बोर्ड के अनुसार, एलओसी प्रक्रिया को तीन चरणों में विभाजित किया गया है, जिसमें पहले चरण में केवल फॉर्म भरना होता है और इसके लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाता। दूसरे और तीसरे चरण में छात्र अपने विषयों में बदलाव कर सकते हैं और निर्धारित परीक्षा शुल्क जमा कर सकते हैं।
बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई छात्र एलओसी जमा करने और शुल्क भरने के बाद भी द्वितीय परीक्षा में शामिल नहीं होता है, तो उसके परिणाम के लिए मुख्य परीक्षा के अंक ही मान्य होंगे।
इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार की आर्थिक दबाव की स्थिति छात्रों और उनके परिवारों के लिए चिंता का विषय है। वहीं, सीबीएसई की सख्ती के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित स्कूल इन निर्देशों का पालन कितनी गंभीरता से करते हैं।