पाली का गुलाब हलवा: होली में मिठास और खुशबू का प्रतीक, देश-विदेश में मांग

Edited By Anil Jangid, Updated: 02 Mar, 2026 03:40 PM

rajasthani gulab halwa from pali becomes ho li delight

पाली: पाली का गुलाब हलवा केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि स्वाद और खुशबू का प्रतीक बन चुका है। होली के मौसम में चैन सिंह की दुकान पर श्रद्धालुओं और प्रवासियों की भीड़ उमड़ पड़ती है। यह हलवा अब केवल राजस्थान या भारत तक सीमित नहीं, बल्कि दुबई, लंदन और...

पाली: पाली का गुलाब हलवा केवल एक मिठाई नहीं, बल्कि स्वाद और खुशबू का प्रतीक बन चुका है। होली के मौसम में चैन सिंह की दुकान पर श्रद्धालुओं और प्रवासियों की भीड़ उमड़ पड़ती है। यह हलवा अब केवल राजस्थान या भारत तक सीमित नहीं, बल्कि दुबई, लंदन और अमेरिका तक लोकप्रिय हो गया है। इतना ही नहीं, देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसके मुरीद हैं।

 

पाली का गुलाब हलवा केवल तीन मुख्य सामग्रियों—शुद्ध दूध, शक्कर और इलायची—से तैयार किया जाता है। इसका असली जादू धीमी आंच और सही पकाने की तकनीक में है। दूध को तब तक उबाला जाता है जब तक वह गाढ़ा होकर गहरे मेहरून रंग का न हो जाए। स्थानीय कारीगरों का हुनर और पाली का क्लाइमेट इसे वह दानेदार बनावट देता है, जो चखने पर यादगार अनुभव बन जाती है।

 

गुलाब हलवे का जन्म लगभग 60 साल पहले हुआ था। मूलचंद कास्टिया की मिठाई की दुकान में गुलाब पुरी नाम के कारीगर ने बचा हुआ दूध शक्कर के साथ धीमी आंच पर पकाया। धीरे-धीरे दूध मावे में बदल गया और उसका रंग गहरा लाल हो गया। इसका स्वाद पारंपरिक मिठाइयों से बिल्कुल अलग निकला और इसे ‘गुलाब हलवा’ नाम दिया गया। तब से यह पाली की सिग्नेचर डिश बन गई है।

 

आज गुलाब हलवा एक बड़े उद्योग का रूप ले चुका है। सालाना कारोबार 20 करोड़ रुपये से अधिक का है। होली के सीजन में कारीगरों को सांस लेने तक की फुर्सत नहीं मिलती और हजारों किलो हलवा हाथों-हाथ बिक जाता है। विदेशों में रहने वाले भारतीय भी विशेष रूप से 5 से 10 किलो तक का गुलाब हलवा पैक कराकर भेजते हैं।

 

पाली का गुलाब हलवा केवल मिठास का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह शहर की पहचान, संस्कृति और कारीगरों की मेहनत का प्रतीक भी बन चुका है। होली के रंगों के बीच इसकी खुशबू और स्वाद त्योहार को और भी खास बना देते हैं, और इसे चखने वाला हर व्यक्ति इसे याद रखता है।

 

यह मिठाई पाली के लिए केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि गर्व का विषय भी है, जिसने स्थानीय कारीगरों को देश-विदेश में पहचान दिलाई है।

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