Edited By Anil Jangid, Updated: 13 Jun, 2026 01:49 PM

बांसवाड़ा। राजस्थान में खाद की कालाबाजारी रोकने और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भजनलाल सरकार ने खाद वितरण को पूरी तरह डिजिटल प्रणाली से जोड़ने की दिशा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसका उद्देश्य किसानों तक...
बांसवाड़ा। राजस्थान में खाद की कालाबाजारी रोकने और वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भजनलाल सरकार ने खाद वितरण को पूरी तरह डिजिटल प्रणाली से जोड़ने की दिशा में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसका उद्देश्य किसानों तक उर्वरकों की सही और समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
इस योजना के तहत फिलहाल Rajasthan के राजसमंद और सिरोही जिलों में यूनिक फार्मर आईडी आधारित खाद वितरण प्रणाली लागू की गई है। कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी इस प्रयोग की लगातार निगरानी कर रहे हैं और जिला स्तर पर आने वाली समस्याओं और सुझावों को भी रिकॉर्ड किया जा रहा है। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत किसानों को मोबाइल एप या पोर्टल के माध्यम से खाद की दुकान की आईडी चुनकर बुकिंग करनी होगी। बुकिंग के बाद किसान के मोबाइल पर ओटीपी आएगा, जिसे दर्ज करने पर उन्हें खाद लेने की पुष्टि मिल जाएगी। यह बुकिंग 48 घंटे तक मान्य रहेगी। इसके बाद किसान को पोश मशीन के माध्यम से निर्धारित मात्रा में खाद उपलब्ध कराया जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस डिजिटल प्रणाली से खाद वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और कालाबाजारी पर रोक लगेगी। साथ ही, जरूरत से अधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग पर भी नियंत्रण संभव होगा, जिससे मिट्टी की गुणवत्ता को नुकसान कम होगा।
आंकड़ों के अनुसार, Rajasthan में हर साल लगभग 28 लाख मैट्रिक टन यूरिया और 8 लाख मैट्रिक टन डीएपी की खपत होती है। इतनी बड़ी मात्रा में उर्वरक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
इस पूरी प्रणाली की आधारशिला केंद्र सरकार की एग्रीस्टैक योजना है, जिसके तहत किसानों की जमीन को आधार कार्ड से जोड़कर यूनिक फार्मर आईडी तैयार की जा रही है। इस परियोजना में करीब 90 प्रतिशत भूमि डेटा पहले ही डिजिटल किया जा चुका है। यह आईडी पहले से ही पीएम किसान सम्मान निधि योजना से भी जुड़ी हुई है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह व्यवस्था सफल होती है तो यह न केवल कालाबाजारी रोकने में मदद करेगी, बल्कि भारत में कृषि आपूर्ति श्रृंखला को आधुनिक और डेटा आधारित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।