Edited By Anil Jangid, Updated: 03 Oct, 2026 04:43 PM
जयपुर। राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों का आधिकारिक कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की।
जयपुर। राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों का आधिकारिक कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया कि पंचायती राज चुनाव चार चरणों में कराए जाएंगे। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही ग्रामीण राजस्थान में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू हो गई होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 13 अक्टूबर निर्धारित की गई है। नामांकन फॉर्म सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक है।
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार 8 अक्टूबर को पंचायत चुनाव की लोक सूचना जारी होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 13 अक्टूबर निर्धारित की गई है। नामांकन फॉर्म सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक जमा किए जा सकेंगे। 14 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 15 अक्टूबर नाम वापस लेने की अंतिम तारीख होगी।
पंचायत समिति सदस्यों के लिए पहले चरण की अधिसूचना 8 अक्टूबर, दूसरे चरण की 13 अक्टूबर, तीसरे चरण की 19 अक्टूबर और चौथे चरण की अधिसूचना 21 अक्टूबर को जारी होगी। मतदान के चरणों के लिए 13 अक्टूबर, 16 अक्टूबर और 23 अक्टूबर की तारीखें घोषित की गई हैं। विस्तृत कार्यक्रम में संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों के अनुसार चौथे चरण की प्रक्रिया भी निर्धारित की जाएगी।
इस बार राजस्थान की 41 जिला परिषदों और 457 पंचायत समितियों के चुनाव होंगे। इसके साथ ही 14,403 ग्राम पंचायतों में सरपंच और वार्ड पंचों का चुनाव कराया जाएगा। चुनाव के जरिए 1,403 जिला परिषद सदस्य, 8,245 पंचायत समिति सदस्य, 41 जिला प्रमुख, 457 प्रधान, 14,403 सरपंच और 1,30,589 वार्ड पंच चुने जाएंगे।
चुनाव में मतदान की प्रक्रिया भी अलग-अलग स्तरों पर निर्धारित की गई है। सरपंच और वार्ड पंच के चुनाव बैलेट पेपर के माध्यम से होंगे और ये चुनाव पार्टी के आधिकारिक 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू रहेगा। इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए भी निर्धारित नियमों के अनुसार सीटें आरक्षित की गई हैं। सरपंच पदों में एसटी के लिए 3,058, एससी के लिए 2,493 और ओबीसी के लिए 1,961 पद आरक्षित बताए गए हैं। बांसवाड़ा, चुनाव चिन्ह पर नहीं लड़े जाएंगे। वहीं पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के चुनाव पार्टी सिंबल पर होंगे और इनमें EVM का इस्तेमाल किया जाएगा।
पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू रहेगा। इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए भी निर्धारित नियमों के अनुसार सीटें आरक्षित की गई हैं। सरपंच पदों में एसटी के लिए 3,058, एससी के लिए 2,493 और ओबीसी के लिए 1,961 पद आरक्षित बताए गए हैं। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों में एसटी के सभी 1,253 सरपंच पद आरक्षित रहेंगे।
वार्ड पंचों के स्तर पर एससी के लिए 21,962 और एसटी के लिए 19,117 वार्ड आरक्षित किए गए हैं। ओबीसी के लिए करीब 15 हजार वार्ड आरक्षित बताए गए हैं। आरक्षण से संबंधित अंतिम जानकारी संबंधित आधिकारिक अधिसूचन अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें लगभग 51.82 प्रतिशत पुरुष और 48.18 प्रतिशत महिला मतदाता बताए गए हैं। जयपुर जिले में सबसे ज्यादा करीब 18.99 लाख मतदाता हैं, जबकि जैसलमेरी प्रक्रिया से जुड़े क्षेत्रों में सरकारी तबादलों और नई नीतिगत घोषणाओं पर रोक सहित निर्धारित प्रतिबंध लागू हो गए हैं। मंत्रियों के सरकारी वाहनों पंचायती राज व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों का चुनाव होगा। उम्मीदवारों और मतदाताओं को नामांकन, आरक्षण, मतदान केंद्र, मताओं और निर्वाचन आयोग के आदेशों से देखी जा सकती है।
राजस्थान में इस चुनाव में करीब 4.03 करोड़ पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इनमें लगभग 51.82 प्रतिशत पुरुष और 48.18 प्रतिशत महिला मतदाता बताए गए हैं। जयपुर जिले में सबसे ज्यादा करीब 18.99 लाख मतदाता हैं, जबकि जैसलमेर में करीब 4.36 लाख मतदाता हैं।
चार जिलों—कोटा, श्रीगंगानगर, बारां और करौली—में जिला प्रमुख और प्रधान के चुनाव 22 दिसंबर को कराए जाने की जानकारी दी गई है। चुनाव कार्यक्रम जारी होने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक और राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
आचार संहिता लागू होने के बाद चुनावी प्रक्रिया से जुड़े क्षेत्रों में सरकारी तबादलों और नई नीतिगत घोषणाओं पर रोक सहित निर्धारित प्रतिबंध लागू हो गए हैं। मंत्रियों के सरकारी वाहनों और सरकारी गेस्ट हाउस या डाक बंगलों के इस्तेमाल को लेकर भी आयोग द्वारा नियम लागू किए गए हैं।
इन चुनावों के जरिए राजस्थान की त्रि-स्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों का चुनाव होगा। उम्मीदवारों और मतदाताओं को नामांकन, आरक्षण, मतदान केंद्र, मतदाता सूची और अन्य जानकारी के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक सूचनाओं को ही अंतिम आधार मानना चाहिए।