Edited By Anil Jangid, Updated: 02 Aug, 2026 05:13 PM

जयपुर। राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के अंतर्गत खरीफ 2026 एवं रबी 2026-27 सत्र की अधिसूचना जारी की जा चुकी है। योजना के प्रावधानों के अनुसार खरीफ 2026 के नामांकन शुरू होने पर वित्तीय संस्थानों का यह दायित्व है कि पात्र...
जयपुर। राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) के अंतर्गत खरीफ 2026 एवं रबी 2026-27 सत्र की अधिसूचना जारी की जा चुकी है। योजना के प्रावधानों के अनुसार खरीफ 2026 के नामांकन शुरू होने पर वित्तीय संस्थानों का यह दायित्व है कि पात्र किसानों से संबंधित भूमि रिकॉर्ड, फसल का नाम, केसीसी आदि की समस्त जानकारी राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर सही-सही दर्ज की जाए।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने इस संबंध में राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के समन्वयक, अपेक्स बैंक के प्रबंध निदेशक, राजस्थान ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक, सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार तथा सीएससी के राज्य प्रमुख को पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
पत्र में कहा गया है कि विगत वर्षों में प्रायः यह देखा गया है कि बीमाकर्ता वित्तीय संस्थान किसानों की भूमि एवं फसल संबंधी विवरण की जांच किए बिना ही फसल बीमा पॉलिसियां सृजित कर देते हैं। किसानों के वास्तविक विवरण और सृजित पॉलिसियों के विवरण में भिन्नता होने के कारण फसल बीमा के क्लेम विवादित हो जाते हैं तथा उनमें विलंब होता है। इससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इस समस्या को रोकने के लिए आयुक्त कृषि ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में पॉलिसी सृजन के समय किसानों के फसल बीमा संबंधी समस्त विवरण राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर सही रूप से दर्ज किए जाएं। किसानों द्वारा बोई गई फसल अथवा प्रस्तावित बोई जाने वाली फसल का सही विवरण ही पोर्टल पर इंद्राज किया जाए। यदि बीमित फसल और किसानों की वास्तविक बोई गई फसल में कोई भिन्नता पाई जाती है, तो इसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित वित्तीय संस्थान की होगी।
आयुक्त ने विशेष रूप से यह भी स्पष्ट किया है कि फसल बीमा पॉलिसी के लिए नामांकन संबंधित किसान की सहमति से ही किया जाए। किसान की जानकारी के बिना केवल केसीसी में अंकित फसल के आधार पर स्वयं के स्तर से फसल बीमा पॉलिसी सृजित करना किसानों के हित में नहीं है।
कृषि आयुक्त ने सभी संबंधित वित्तीय संस्थानों से कहा कि वे योजना के प्रावधानों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करें, ताकि किसानों को समय पर और सही फसल बीमा सुरक्षा मिल सके तथा क्लेम संबंधी विवादों से बचा जा सके।