फलोदी से जुड़ा राजस्थान नकली बीज घूसकांड, 60 लाख की कथित स्क्रिप्ट पर सस्पेंस

Edited By Anil Jangid, Updated: 11 Jun, 2026 02:49 PM

rajasthan fake seed bribery case linked to phalodi

फलोदी। राजस्थान में पिछले कुछ समय से चर्चा में रहे नकली बीज घूसकांड में एसीबी की जांच अब फलोदी तक पहुंचती दिख रही है। मामले में कथित 60 लाख रुपए के लेन-देन की जांच में सामने आया है कि इसमें एक स्थानीय खाद-बीज कारोबारी सतपाल की भूमिका अहम हो सकती है।

फलोदी। राजस्थान में पिछले कुछ समय से चर्चा में रहे नकली बीज घूसकांड में एसीबी की जांच अब फलोदी तक पहुंचती दिख रही है। मामले में कथित 60 लाख रुपए के लेन-देन की जांच में सामने आया है कि इसमें एक स्थानीय खाद-बीज कारोबारी सतपाल की भूमिका अहम हो सकती है। सतपाल लंबे समय से फलोदी में खाद-बीज का व्यवसाय कर रहा है और नगर के नागौर रोड पर उसकी बड़ी दुकान संचालित है।

 

सूत्रों के अनुसार, कथित घूसकांड में फलोदी विधायक पब्बाराम विश्नोई के पूर्व निजी सहायक गणपत विश्नोई और कारोबारी सतपाल के बीच संपर्क इसी व्यावसायिक नेटवर्क के जरिए स्थापित हुआ था। माना जा रहा है कि इसी नेटवर्क के माध्यम से 60 लाख रुपए का कथित लेन-देन हुआ और घूसकांड की “स्क्रिप्ट” तैयार की गई। हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

 

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    एसीबी की जांच का सबसे अहम सवाल यह है कि यह राशि किन-किन माध्यमों से आगे बढ़ी और इसका अंतिम गंतव्य कहां था। जांच एजेंसियां पूरी लेन-देन श्रृंखला को खंगाल रही हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि यदि इस कड़ी का खुलासा होता है, तो राजस्थान में कई नए नाम सामने आ सकते हैं।

     

    बीज के प्रचार-प्रसार को लेकर भी कई चर्चाएं उठ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, गजराज मूंगफली बीज की गुणवत्ता पर जांच शुरू होने के बावजूद शहर में बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर इसे बढ़ावा देने की कोशिश की गई। स्थानीय जानकारों का कहना है कि इस तरह का प्रचार अभियान पहले कभी नहीं देखा गया था। दिलचस्प यह रहा कि घूसकांड का खुलासा होने के कुछ समय बाद ये होर्डिंग हटा दिए गए।

     

    इस प्रकरण में फलोदी विधायक पब्बाराम विश्नोई के पूर्व निजी सहायक गणपत विश्नोई का नाम भी सामने आया। विधायक ने कहा कि जैसे ही उन्हें गणपत की कथित गतिविधियों की जानकारी मिली, उन्होंने 31 मई को उसे निजी सचिव के पद से हटा दिया। इसके बाद एसीबी ने जयपुर में विधायक आवास पर उसे गिरफ्तार किया।

     

    राजनीतिक और प्रशासनिक सर्किलों में इस मामले की गहराई और भविष्य में संभावित खुलासों को लेकर कड़ी निगरानी जारी है। यह घूसकांड न केवल स्थानीय राजनीति, बल्कि राजस्थान के कृषि और बीज व्यवसाय में पारदर्शिता के महत्व को भी उजागर करता है।

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