देवनानी से मिले उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, लोकतांत्रिक और विधायी परंपराओं पर हुई चर्चा

Edited By Sourabh Dubey, Updated: 04 Oct, 2026 01:27 PM

rajasthan assembly speaker vasudev devnani meets up speaker satish mahana jaipur

राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से रविवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने जयपुर स्थित सिविल लाइंस के राजकीय आवास पर मुलाकात की। इस दौरान दोनों विधानसभा अध्यक्षों के बीच देश की लोकतांत्रिक एवं विधायी परंपराओं, विधानसभा के...

जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी से रविवार को उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने जयपुर स्थित सिविल लाइंस के राजकीय आवास पर मुलाकात की। इस दौरान दोनों विधानसभा अध्यक्षों के बीच देश की लोकतांत्रिक एवं विधायी परंपराओं, विधानसभा के सुचारु संचालन और सदनों की कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुलाकात के दौरान राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना का दुपट्टा पहनाकर स्वागत एवं अभिवादन किया। दोनों नेताओं ने विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के बीच संसदीय अनुभवों और श्रेष्ठ परंपराओं के आदान-प्रदान को लेकर भी विचार-विमर्श किया।

लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारभूत संस्थाएं हैं विधान सभाएं

वासुदेव देवनानी ने कहा कि देश की विधान सभाएं लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारभूत संस्थाएं हैं। इनके माध्यम से जनप्रतिनिधि आमजन की भावनाओं और समस्याओं को सदन तक पहुंचाते हैं। साथ ही जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर सदन में सार्थक चर्चा और विमर्श होता है।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों की विधानसभाओं के बीच अनुभवों और श्रेष्ठ संसदीय परंपराओं का आदान-प्रदान लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे संवाद से सदनों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने और संसदीय परंपराओं को मजबूती देने में सहायता मिलती है।

सतीश महाना ने राजस्थान विधानसभा की परंपराओं की सराहना की

उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने राजस्थान विधानसभा की गौरवशाली संसदीय परंपराओं की सराहना की। उन्होंने राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित अमृत महोत्सव के लिए वासुदेव देवनानी को शुभकामनाएं दीं।

दोनों विधानसभा अध्यक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि विभिन्न राज्यों की विधायी संस्थाओं के बीच संसदीय अनुभवों का आदान-प्रदान लगातार जारी रहना चाहिए। इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था और विधायी संस्थाओं को और अधिक प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी।

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