संसद में गूंजा चूरू के हरित भविष्य का मुद्दा, राहुल कस्वां ने पूछा- वन क्षेत्र सिर्फ 0.45% क्यों?

Edited By Ishika Jain, Updated: 27 Jul, 2026 06:07 PM

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चूरू सांसद राहुल कस्वां ने संसद में जिले के केवल 0.45% वन क्षेत्र का मुद्दा उठाया। केंद्र सरकार ने वन क्षेत्र के आंकड़े साझा किए, जबकि सांसद ने चूरू के लिए विशेष हरित विकास योजना और परिणाम आधारित रणनीति की मांग की।

चूरू। चूरू लोकसभा क्षेत्र के सांसद राहुल कस्वां ने संसद में जिले के बेहद कम वन क्षेत्र का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार से हरित विकास को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी। सरकार के जवाब में सामने आया कि भारत वन स्थिति रिपोर्ट-2023 के अनुसार चूरू जिले में वन क्षेत्र केवल 62.73 वर्ग किलोमीटर, यानी जिले के कुल भौगोलिक क्षेत्र का महज 0.45 प्रतिशत है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय और राज्य औसत की तुलना में काफी कम है।

केंद्र सरकार के अनुसार देश का औसत वन क्षेत्र 21.76 प्रतिशत, जबकि राजस्थान का औसत 4.84 प्रतिशत है। ऐसे में मरुस्थलीय जिले चूरू में हरित क्षेत्र का बेहद सीमित होना पर्यावरण और जलवायु दोनों दृष्टि से चिंता का विषय माना जा रहा है।

केंद्र से पूछा- योजनाओं के बावजूद क्यों नहीं बढ़ा वन क्षेत्र?

सांसद राहुल कस्वां ने संसद में सवाल उठाते हुए जानना चाहा कि ग्रीन इंडिया मिशन, नगर वन योजना, मरुस्थलीकरण रोकथाम कार्यक्रम और अन्य केंद्रीय योजनाओं के संचालन के बावजूद चूरू में वन क्षेत्र में अपेक्षित वृद्धि क्यों नहीं हो सकी। साथ ही उन्होंने जिले के लिए भविष्य की हरित विकास रणनीति के बारे में भी जानकारी मांगी।

सरकार ने बताई प्राकृतिक चुनौतियां

सरकार ने अपने उत्तर में कहा कि चूरू अर्ध-शुष्क (सेमी-एरिड) क्षेत्र में स्थित है, जहां कम वर्षा और सीमित जल उपलब्धता के कारण स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ही पौधारोपण किया जाता है। सरकार ने यह भी बताया कि जिले में ताल छापर अभयारण्य की पारिस्थितिकी सुरक्षा के लिए पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र अधिसूचित किया गया है।

इसके अलावा ग्रीन इंडिया मिशन, नगर वन योजना और कैम्पा जैसी योजनाओं के माध्यम से राज्यों को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

चूरू में तीन नगर वन परियोजनाएं स्वीकृत

सरकार के अनुसार राजस्थान में नगर वन योजना के तहत कुल 55 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनमें चूरू जिले की तीन परियोजनाएं भी शामिल हैं। हालांकि सांसद राहुल कस्वां ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि योजनाएं और परियोजनाएं स्वीकृत होने के बावजूद वन क्षेत्र में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

मरुस्थलीकरण और जल संकट पर जताई चिंता

राहुल कस्वां ने कहा कि चूरू उन जिलों में शामिल है जहां कम वर्षा, बढ़ता मरुस्थलीकरण, लगातार गिरता भूजल स्तर और अत्यधिक तापमान जैसी चुनौतियां पहले से मौजूद हैं। ऐसे में वन क्षेत्र का बेहद कम होना केवल पर्यावरण का विषय नहीं, बल्कि जल संरक्षण, कृषि, पशुपालन और आम लोगों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है।

उन्होंने कहा कि केवल पौधारोपण के आंकड़े प्रस्तुत करना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब वन क्षेत्र में स्थायी और मापनीय वृद्धि दिखाई दे तथा उसका लाभ स्थानीय लोगों को मिले।

विशेष हरित विकास योजना की मांग

सांसद राहुल कस्वां ने केंद्र सरकार से चूरू जैसे संवेदनशील मरुस्थलीय जिले के लिए अलग और दीर्घकालिक हरित विकास योजना तैयार करने की मांग की है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस योजना में अगले दस वर्षों के लिए वन क्षेत्र बढ़ाने का लक्ष्य तय किया जाए। साथ ही ग्राम पंचायतों, गोचर भूमि और सार्वजनिक भूमि पर बड़े पैमाने पर पौधारोपण, सूखा-सहिष्णु देशी प्रजातियों का रोपण, परियोजनाओं की तृतीय-पक्ष निगरानी, पौधों की उत्तरजीविता का मूल्यांकन, जनभागीदारी और हर वर्ष सार्वजनिक प्रगति रिपोर्ट जैसी व्यवस्थाएं भी शामिल की जाएं।

'घोषणाओं से अधिक परिणाम जरूरी'

राहुल कस्वां का कहना है कि चूरू का 0.45 प्रतिशत वन क्षेत्र केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि भविष्य के लिए चेतावनी है। यदि समय रहते परिणाम आधारित और वैज्ञानिक रणनीति नहीं अपनाई गई तो आने वाले वर्षों में मरुस्थलीकरण, जल संकट और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि चूरू को केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों की आवश्यकता है।

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