कश्मीर लगभग पूरी तरह से मुख्यधारा में आ चुका है : रॉ के पूर्व प्रमुख दुलत

Edited By PTI News Agency, Updated: 22 Jan, 2023 08:28 PM

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जयपुर, 22 जनवरी (भाषा) रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व प्रमुख ए .एस.दुलत ने रविवार को कहा कि कश्मीर ''''लगभग पूरी तरह से मुख्यधारा में आ चुका है’’ और कश्मीरियों के दिमाग से पाकिस्तान निकल गया है तथा अलगाववाद और हुर्रियत ''''सब खत्म''''...

जयपुर, 22 जनवरी (भाषा) रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के पूर्व प्रमुख ए .एस.दुलत ने रविवार को कहा कि कश्मीर ''लगभग पूरी तरह से मुख्यधारा में आ चुका है’’ और कश्मीरियों के दिमाग से पाकिस्तान निकल गया है तथा अलगाववाद और हुर्रियत ''सब खत्म'' हो गए हैं।

दुलत ने हालांकि कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 को समाप्त करने की कोई जरूरत नहीं थी जो जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्रदान करता था, क्योंकि इसमें कुछ बचा नहीं था और यह केवल ''अपनी गरिमा'' को बचाए रखने का एक माध्यम था।
‘जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल’ (जेएलएफ) में यहां एक सत्र में दुलत ने प्रिंस हैरी की हालिया किताब 'स्पेयर' का जिक्र करते हुए कहा कि ब्रिटिश शाही परिवार के पूर्व सदस्य ने लिखा है कि ''जीवन की तमाम विसंगतियों में, उन्हें केवल एक चीज जो सामान्य दिखाई दी और जिसका उन्होंने आनंद उठाया, वह अफगानिस्तान था।'' दुलत ने कहा कि वह कश्मीर के बारे में यही बात कह सकते हैं।

प्रिंस हैरी अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ युद्ध में लड़ने के लिए ब्रिटिश सेना में शामिल हुए थे।

दुलत ने यह भी कहा कि आतंकवाद में गिरावट जारी रहेगी लेकिन ''जब तक पाकिस्तान के साथ मामला सुलझा नहीं लिया जाता, आतंकवाद बना रहेगा।'' साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के साथ वार्ता की वकालत की।

उन्होंने कहा, ''पाकिस्तान कश्मीर का अभिन्न अंग रहा है। वर्ष 1947 से, भारत सरकार जो करने की कोशिश कर रही है वह कश्मीर को मुख्यधारा में लाना और पाकिस्तान को कश्मीरियों के दिमाग से बाहर निकालना है। और मुझे लगता है कि हम काफी हद तक सफल भी हुए हैं।’’1999-2000 के दौरान खुफिया एजेंसी का नेतृत्व करने वाले दुलत ने कहा, "आज, कश्मीर लगभग पूरी तरह से मुख्यधारा में आ गया है। हम जिस अलगाववाद, हुर्रियत की बात करते हैं, वह सब खत्म हो गया है।"वह हार्पर कॉलिन्स इंडिया द्वारा प्रकाशित उनकी नवीनतम पुस्तक "ए लाइफ इन द शैडोज़: ए मेमॉयर" के बारे में वरिष्ठ पत्रकार मंदिरा नायर के साथ बातचीत कर रहे थे।

वर्ष 1965 बैच के सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी ने कहा, "मैंने तर्क दिया था कि हमें अनुच्छेद 370 को खत्म नहीं करना है क्योंकि इसमें कुछ भी नहीं बचा था। यह केवल एक पर्दा था जिसने एक कश्मीरी को थोड़ी गरिमा मिली हुई थी।’’गौरतलब है कि केंद्र ने पांच अगस्त, 2019 को अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया।

ब्रिटिश सेना के साथ अफगानिस्तान में प्रिंस हैरी के कार्यकाल को लेकर उनकी टिप्पणी का जिक्र करते हुए दुलत ने कहा,'' कश्मीर के बारे में मैं यही कह सकता हूं। हम आज भी उसे प्यार करते हैं, वहां जाते हैं, आनंद उठाते हैं ..... दुर्भाग्य से, दिल्ली ने हमेशा से ही इसे स्याह सफेद के तौर पर देखा है। वे बाकी को नहीं समझते। आप केवल गुलमर्ग या पहलगाम में छुट्टियां बिताने नहीं बल्कि सही में कश्मीर जाएं और श्रीनगर में लोगों से बात करें तो आप पाएंगे कि वे बहुत ही दयालु, भले और नेकदिल इंसान हैं।''उन्होंने कहा, ''लेकिन मैंने मीरवाइज उमर फारूक समेत कई कश्मीरी नेताओं से बातचीत की है। मीरवाइज अभी जेल में हैं और वह कहते हैं कि उन्हें थोड़ी चालाकी से काम लेना पड़ता है क्योंकि आपने हम लोगों को यही सिखाया है क्योंकि आपने हमसे कभी सच नहीं बोला। इसलिए हमने भी आपसे झूठ बोला।''दुलत रॉ के एकमात्र ऐसे प्रमुख रहे हैं जिन्होंने पाकिस्तान की यात्रा की। उन्होंने कहा कि वह 2010 से 2012 के बीच चार बार पड़ोसी देश की यात्रा पर गए । उन्होंने कहा, ''मैं दो बार लाहौर गया और इस्लामाबाद तथा कराची की भी यात्रा की। ये एक बहुत ही शानदार अनुभव था।'' उन्होंने कहा कि उन्होंने ट्रैक 2 या पर्दे के पीछे की कूटनीति के जरिए पाकिस्तान को बेहतर तरीके से जाना।

अपनी नवीनतम पुस्तक "ए लाइफ इन द शैडोज़" में, वह भारत के वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के बारे में भी बात करते हैं।

'डोभाल सिद्धांत' और 'दुलत सिद्धांत' के बीच समानताएं बताने के लिए पूछे जाने पर, भारत की बाहरी खुफिया एजेंसी के पूर्व प्रमुख ने कहा कि उनके पास कोई सिद्धांत नहीं है।

उन्होंने कहा, "श्री डोभाल का एक सिद्धांत है, मुझे नहीं पता। लोग इसके बारे में बात करते हैं। वर्ष 2000 में सेवा से सेवानिवृत्त हुए दुलत ने कहा कि सेना से सेना के बीच संवाद शुरू करने के भी प्रयास किए गए।''उन्होंने कहा कि भारत की मौजूदा "बाहुबल नीति" कश्मीर में आतंकवाद पर अंकुश लगाने में मददगार साबित हो रही है। दुलत ने कहा, "मेरा तर्क है कि आतंकवाद कम हुआ है और कम होना जारी रहेगा। लेकिन आतंकवाद तब तक बना रहेगा, जब तक हम इसे पाकिस्तान के साथ सुलझा नहीं लेते। पाकिस्तान और चीन से भी बात करना महत्वपूर्ण है।"

यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।

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