सीकर में दो डॉक्टरों की गिरफ्तारी पर बवाल, आरजीएचएस मामले ने उठाया तूल

Edited By Anil Jangid, Updated: 06 May, 2026 03:01 PM

protests erupt in sikar over arrest of two doctors in rghs case

सीकर: सीकर में आरजीएचएस योजना में कथित गड़बड़ी को लेकर बीते दिन दो चिकित्सकों की गिरफ्तारी ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। राजकीय एसके अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. केके अग्रवाल और एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर से जुड़े डॉ. बी. लाल को एसओजी ने अचानक...

सीकर: सीकर में आरजीएचएस योजना में कथित गड़बड़ी को लेकर बीते दिन दो चिकित्सकों की गिरफ्तारी ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। राजकीय एसके अस्पताल के पूर्व अधीक्षक डॉ. केके अग्रवाल और एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर से जुड़े डॉ. बी. लाल को एसओजी ने अचानक हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई के खिलाफ आज दूसरे दिन भी सीकर के सेवारत और निजी चिकित्सकों में भारी रोष देखा गया।

 

जानकारी के अनुसार, निजी अस्पतालों के डॉक्टरों ने एकजुटता दिखाते हुए सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक ओपीडी बंद रखी। इस दौरान इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। अस्पताल में केवल रेजिडेंट डॉक्टर और इंटर्न ही मोर्चा संभालते हुए आपातकालीन सेवाएं प्रदान कर रहे थे।

 

मामले में विभिन्न चिकित्सक संगठनों के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही कोई कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि बिना पूरी जांच पड़ताल के चिकित्सकों को हिरासत में लेना निंदनीय है।

 

संगठनों के पदाधिकारियों ने साफ किया कि यदि गिरफ्तार चिकित्सकों को जल्द रिहा नहीं किया गया तो आज शाम सभी चिकित्सा संगठन बैठक कर बड़े आंदोलन की रणनीति तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि चिकित्सक अपने हक और अधिकारों के लिए आखिरी सांस तक लड़ेंगे।

 

स्थानीय लोगों और मरीजों में भी इस कार्रवाई को लेकर नाराजगी है। कई मरीजों ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा न आए और चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।

 

यह मामला राज्य में आरजीएचएस योजना के संचालन और चिकित्सकों के अधिकारों के मुद्दे को फिर से उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि चिकित्सक समुदाय में इस तरह की गिरफ्तारी से विश्वास और तनाव दोनों बढ़ सकते हैं, जिससे मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।

 

अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन किस प्रकार इस विवाद को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से सुलझाता है।

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