Edited By Anil Jangid, Updated: 13 Jun, 2026 01:55 PM

झुंझुनूं: झुंझुनूं के एक गांव इस्लामपुर का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने के प्रस्ताव ने स्थानीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस प्रस्ताव के खिलाफ ग्रामीणों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है और वे इसे अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान पर सीधा असर...
झुंझुनूं: झुंझुनूं के एक गांव इस्लामपुर का नाम बदलकर श्रीरामपुर करने के प्रस्ताव ने स्थानीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस प्रस्ताव के खिलाफ ग्रामीणों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है और वे इसे अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान पर सीधा असर मान रहे हैं।
गांव के लोगों का कहना है कि Islampur village केवल एक नाम नहीं, बल्कि करीब 400 साल पुरानी विरासत, सामाजिक सौहार्द और साझा संस्कृति की पहचान है। ग्रामीणों के अनुसार, यह क्षेत्र 16वीं सदी में बसाया गया था और तब से यहां हिन्दू-मुस्लिम एकता और सांस्कृतिक समन्वय की परंपरा कायम रही है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि गांव में कई ऐतिहासिक और सैन्य योगदान देने वाले परिवार रहे हैं। यहां के कुछ परिवारों के सदस्य भारतीय सेना और वायुसेना में सेवाएं दे चुके हैं और उन्हें वीरता के लिए सम्मान भी मिला है। ग्रामीणों का मानना है कि इस प्रकार की ऐतिहासिक पहचान को किसी भी नाम परिवर्तन से कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
गांव में मौजूद धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को भी ग्रामीण अपनी साझा विरासत का प्रतीक बताते हैं। यहां मस्जिद और मंदिर दोनों की मौजूदगी के साथ-साथ सूफी संतों की दरगाह भी सामाजिक समरसता का केंद्र रही है, जहां सभी समुदायों के लोग श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं।
नाम बदलने के प्रस्ताव के विरोध में ग्रामीणों ने आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। 15 जून को गांव से जिला मुख्यालय तक पैदल मार्च निकालने की घोषणा की गई है। इसको लेकर हाल ही में गांव में बैठक भी हुई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर नाम परिवर्तन के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपने गांव का नाम बदलने नहीं देंगे, क्योंकि यह उनकी पहचान और इतिहास से जुड़ा मामला है। उनका आरोप है कि बिना व्यापक सहमति के यह प्रस्ताव आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
इस मामले ने Rajasthan की ग्रामीण राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। अब सभी की नजर प्रशासनिक निर्णय और आगामी आंदोलन पर टिकी हुई है।