Edited By Anil Jangid, Updated: 16 Apr, 2026 08:31 PM

जयपुर। विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलपति, प्रो. एन. डी. माथुर ने आज राजस्थान राज्य सेवा के फाउंडेशन बैच–2026 के अधिकारियों को संबोधित करते हुए रचनात्मकता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि रचनात्मकता केवल एक कौशल नहीं है, बल्कि यह जीवन...
जयपुर। विवेकानंद ग्लोबल यूनिवर्सिटी के कुलपति, प्रो. एन. डी. माथुर ने आज राजस्थान राज्य सेवा के फाउंडेशन बैच–2026 के अधिकारियों को संबोधित करते हुए रचनात्मकता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि रचनात्मकता केवल एक कौशल नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने का एक तरीका है जो हर क्षेत्र में आवश्यक है। उनका मानना है कि आज के समय में रचनात्मकता और नवाचार सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि अस्तित्व की आवश्यकता बन चुके हैं।
प्रो. माथुर ने प्रशासन में रचनात्मकता की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए इसके विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि जब हम प्रशासन की बात करते हैं, तो हमें सच्चे रूप में समाज की समस्याओं का समाधान करने के लिए रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाना होता है। प्रशासनिक कार्यों में रचनात्मकता न केवल कार्यों को सरल बनाती है, बल्कि यह कर्मचारियों और जनता के बीच बेहतर संबंध भी स्थापित करती है।
उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे अपने "कम्फर्ट जोन" से बाहर निकलकर नए दृष्टिकोणों और विचारों को अपनाएं। उन्होंने रचनात्मकता के विकास के लिए कुछ कदम भी साझा किए, जैसे- विभिन्न दृष्टिकोणों से समस्याओं को देखना, टीमवर्क को बढ़ावा देना, और चुनौतियों का स्वागत करना।
प्रो. माथुर ने रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए एक व्यावहारिक मंत्र भी प्रस्तुत किया, जिसे उन्होंने "ASARA MOMONA" के नाम से संबोधित किया। यह मंत्र अधिकारियों को रचनात्मकता को समझने और उसे लागू करने के लिए एक रोडमैप प्रदान करता है। ASARA MOMONA के तहत वे रचनात्मकता के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नवाचार को अपनाने के सुझाव देते हैं।
अंत में, प्रो. माथुर ने राज्य सेवा के अधिकारियों से यह अपील की कि वे अपने दृष्टिकोण में बदलाव लाएं और प्रशासन को अधिक प्रभावी, संवेदनशील और परिणामोन्मुख बनाने के लिए लगातार नवाचार करें। उन्होंने यह भी कहा कि रचनात्मकता केवल सोचने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसे कार्यों में भी उतारना आवश्यक है।