Edited By Anil Jangid, Updated: 12 Jun, 2026 03:33 PM

बीकानेर: बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और किडनी संक्रमण के गंभीर मामलों ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। इस मामले में प्रदेश के चिकित्सा मंत्री Gajendra Singh Khimsar द्वारा दी गई कथित टिप्पणी ने विवाद और भड़काया।
बीकानेर: बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और किडनी संक्रमण के गंभीर मामलों ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है। इस मामले में प्रदेश के चिकित्सा मंत्री Gajendra Singh Khimsar द्वारा दी गई कथित टिप्पणी ने विवाद और भड़काया। मंत्री के बयान के विरोध में कांग्रेस महिला कार्यकर्ताओं ने बीकानेर के कोटगेट पर जोरदार प्रदर्शन किया और मंत्री का पुतला दहन कर अपना रोष व्यक्त किया।
मामला तब शुरू हुआ जब बीकानेर दौरे पर आए मंत्री खींवसर से पत्रकारों ने प्रसूताओं के इलाज में हुई लापरवाही पर सवाल पूछे। इसके जवाब में मंत्री ने कहा, “पता करो, महिलाएं चलते आईं या नाचते।” इस विवादित टिप्पणी को लेकर पूरे संभाग में तीखी आलोचना हो रही है। विपक्ष और महिला संगठनों का कहना है कि यह बयान प्रसूताओं और प्रदेश की सभी महिलाओं का अपमान है।
मंत्री खींवसर ने प्रेस वार्ता के दौरान जांच रिपोर्ट आने से पहले ही अस्पताल प्रशासन की क्लीन चिट देने की कोशिश की। उन्होंने दावा किया कि इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं हुई है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि यदि दवाओं की वजह से मरीजों की स्थिति बिगड़ी है, तो इसकी गंभीरता से जांच की जाएगी। प्रारंभिक तौर पर 27 प्रकार की दवाओं के नमूने लिए गए हैं, और रिपोर्ट आने के बाद अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।
विपक्ष ने मंत्री के बयान को संवेदनहीन और अशोभनीय करार दिया। कांग्रेस नेताओं ने कहा, “जब गजेंद्र जी स्वयं पैदा हुए थे, तो क्या उनकी माता जी हंसते-नाचते गई थीं? उनके भीतर की संवेदनाएं और भावनाएं पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं।”
करीब दो हफ्ते पहले बीकानेर दौरे पर मंत्री खींवसर ने कहा था कि अस्पताल में लापरवाही या कोटा जैसा कोई मामला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन इस बार उनके तीखे और विवादित बयान ने अस्पताल और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर चिंता को और बढ़ा दिया।
विरोध प्रदर्शन अभी थमा नहीं है। कांग्रेस का कहना है कि जब तक मंत्री सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, प्रदर्शन जारी रहेगा। वहीं, प्रसूताओं के परिजन भी अस्पताल की व्यवस्थाओं और दवाओं की गुणवत्ता को लेकर चिंतित हैं और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने स्वास्थ्य व्यवस्था और संवेदनशील मरीजों के प्रति सरकारी रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और बीकानेर में राजनीतिक तथा सामाजिक तापमान बढ़ा दिया है।