पांचना बांध विवाद: 20 साल पुराना जल संघर्ष फिर क्यों भड़का, समझिए पूरी A to Z कहानी

Edited By Anil Jangid, Updated: 18 Jun, 2026 04:29 PM

panchna dam controversy flared up again in rajasthan

करौली : राजस्थान के पूर्वी हिस्से में स्थित Panchna Dam एक बार फिर बड़े सामाजिक और राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गया है। करौली, सवाई माधोपुर और गंगापुर सिटी की सीमाओं से जुड़े इस बांध को लेकर पिछले लगभग दो दशकों से चल रहा जल-वितरण संघर्ष जून 2026...

करौली : राजस्थान के पूर्वी हिस्से में स्थित Panchna Dam एक बार फिर बड़े सामाजिक और राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गया है। करौली, सवाई माधोपुर और गंगापुर सिटी की सीमाओं से जुड़े इस बांध को लेकर पिछले लगभग दो दशकों से चल रहा जल-वितरण संघर्ष जून 2026 में अचानक फिर से उग्र हो गया है। एक तरफ कमांड क्षेत्र के किसान सिंचाई के लिए नहरों में पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ डूब क्षेत्र के ग्रामीण अपने लंबित मुआवजे और पुनर्वास की मांगों पर अड़े हुए हैं।

 

इस विवाद की जड़ें वर्ष 1977 से 2004 के बीच बने इस बांध के निर्माण से जुड़ी हैं। सिंचाई और पेयजल आपूर्ति के उद्देश्य से बनाए गए इस परियोजना के पूरा होने के बाद से ही जल वितरण को लेकर दो समुदायों के बीच असहमति गहराती चली गई। कमांड क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सवाई माधोपुर और नवगठित गंगापुर सिटी जिले के लगभग 35 गांवों के किसान लंबे समय से खेतों में पानी न पहुंचने से परेशान हैं। उनका कहना है कि 2006 के बाद से उन्हें नियमित सिंचाई का लाभ नहीं मिला, जिससे हजारों बीघा कृषि भूमि बंजर होती जा रही है।

 

वहीं दूसरी ओर करौली जिले के डूब क्षेत्र के लगभग 39 गांवों के ग्रामीणों का कहना है कि बांध बनने के दौरान उनकी पुश्तैनी जमीन और घर जलमग्न हो गए थे, लेकिन अब तक उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिला। साथ ही वे गुड़ला-पांचना लिफ्ट सिंचाई परियोजना के पूर्ण क्रियान्वयन की भी मांग कर रहे हैं।

 

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो चुकी है कि पिछले 20 वर्षों में कई बार सीमित मात्रा में ही पानी छोड़ा गया है, वह भी केवल धार्मिक आयोजनों के लिए। स्थानीय स्तर पर यह विवाद अब केवल पानी का नहीं रहा, बल्कि सामाजिक पहचान और राजनीतिक अधिकारों का मुद्दा बन चुका है।

 

हाल के दिनों में कमांड क्षेत्र के किसानों ने खंडीप गांव में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने को तेज कर दिया है। प्रदर्शनकारी किसान बड़ी संख्या में ट्रैक्टर, जेसीबी मशीनों और रैलियों के साथ दिल्ली-मुंबई रेल मार्ग की ओर बढ़ गए, जिससे प्रशासन को भारी सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा। पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मोर्चा संभाला है।

 

इस पूरे विवाद में राज्य के कैबिनेट मंत्री डॉ. Kirodi Lal Meena के हस्तक्षेप ने भी माहौल को और गर्म कर दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री को चेतावनी पत्र भेजते हुए कहा है कि यदि किसानों के हित में तुरंत जल वितरण शुरू नहीं किया गया, तो वे अपने पद से इस्तीफा देने या धरने पर बैठने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

 

इसी बीच Rajasthan High Court ने भी मामले में हस्तक्षेप करते हुए तीन सप्ताह के भीतर नहरों में पानी छोड़ने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने चेतावनी दी है कि आदेश का पालन न होने पर प्रशासनिक अधिकारियों पर कार्रवाई की जा सकती है।

 

सरकार के सामने अब चुनौती यह है कि वह दोनों पक्षों—कमांड क्षेत्र के किसानों और डूब क्षेत्र के ग्रामीणों—के बीच संतुलन कैसे स्थापित करे। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थायी समाधान के लिए पुनर्वास, मुआवजा और वैज्ञानिक जल वितरण नीति की आवश्यकता है, अन्यथा यह विवाद आगे और गंभीर रूप ले सकता है।

 

इस प्रकार, Panchna Dam का यह पुराना जल-संघर्ष एक बार फिर राजस्थान की राजनीति और सामाजिक व्यवस्था के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है।

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