7 हजार में कैसे चले घर? NSUI जिलाध्यक्ष अंकित घारू ने सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को किया समर्थन

Edited By Anil Jangid, Updated: 03 Jun, 2026 04:37 PM

nsui district chief ankit gharu supports striking sanitation workers

अजमेर। नगर निगम के अस्थाई सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को आज NSUI जिलाध्यक्ष अंकित घारू के समर्थन से नई ताकत मिली। आंदोलन स्थल पर पहुंचे घारू ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए प्रशासन और ठेकेदारों पर तीखा निशाना साधा और कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था को...

अजमेर। नगर निगम के अस्थाई सफाई कर्मचारियों की हड़ताल को आज NSUI जिलाध्यक्ष अंकित घारू के समर्थन से नई ताकत मिली। आंदोलन स्थल पर पहुंचे घारू ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए प्रशासन और ठेकेदारों पर तीखा निशाना साधा और कहा कि शहर की सफाई व्यवस्था को संभालने वाले कर्मचारियों के साथ लगातार अन्याय और उपेक्षा की जा रही है।

 

अंकित घारू ने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन सफाई कर्मचारी अभी भी मात्र 6,500 से 7,000 रुपये मासिक वेतन में काम करने को मजबूर हैं। इतने कम वेतन में परिवार का भरण-पोषण करना लगभग असंभव है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि अस्थाई सफाई कर्मचारियों की प्रतिदिन की हाजरी कम से कम 500 रुपये निर्धारित की जाए और उनकी लंबित समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाए।

 

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    घारू ने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों की जायज मांगों पर प्रशासन ने जल्द सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो हड़ताल को और व्यापक रूप दिया जाएगा। NSUI कार्यकर्ता पूरी ताकत के साथ कर्मचारियों के संघर्ष में खड़े रहेंगे।

     

    हड़ताल स्थल पर कर्मचारियों ने भी अपनी समस्याओं को साझा करते हुए वेतन वृद्धि, नियमित भुगतान और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि पिछले छह महीनों में यह तीसरी बार है जब उन्हें हड़ताल करनी पड़ी, जो प्रशासन की संवेदनहीनता को उजागर करता है।

     

    घारू ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को न्याय की मांग करने का अधिकार है। सफाई कर्मचारी अपने सम्मान और अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जिसे दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए तुरंत समाधान निकाला जाए, ताकि नगर निगम की सफाई व्यवस्था प्रभावित न हो और कर्मचारियों को राहत मिल सके।

     

    इस हड़ताल को मिल रहे बढ़ते समर्थन ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। यदि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो आंदोलन का दायरा और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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