Edited By Anil Jangid, Updated: 03 Jun, 2026 03:19 PM

नागौर: केन्द्र सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की छात्रवृत्ति योजनाओं में फर्जी विद्यार्थियों के नाम पर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी सामने आई है। नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) में सुरक्षा खामी का फायदा उठाकर साइबर ठगों ने राजस्थान सहित देश के आठ...
नागौर: केन्द्र सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की छात्रवृत्ति योजनाओं में फर्जी विद्यार्थियों के नाम पर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी सामने आई है। नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) में सुरक्षा खामी का फायदा उठाकर साइबर ठगों ने राजस्थान सहित देश के आठ राज्यों में यह घोटाला अंजाम दिया। यह फर्जीवाड़ा वर्ष 2021-22 में हुआ, जिसकी जानकारी मंत्रालय को 2025 में मिली। छात्रवृत्ति राशि की रिकवरी के लिए पिछले एक साल से अधिकारी पत्राचार में लगे हुए हैं।
राजस्थान के नागौर जिले में 357 विद्यार्थियों के नाम पर करीब 43 लाख रुपए की फर्जी छात्रवृत्ति जारी की गई। इसमें 207 विद्यार्थी नागौर और 150 विद्यार्थी डीडवाना-कुचामन के बताए गए। प्रदेश में यह आंकड़ा हजारों में है और पूरे देश में आठ राज्यों में ऐसे मामले सामने आए हैं। जांच में पाया गया कि ज्यादातर फर्जी छात्र पश्चिम बंगाल और बिहार के थे।
साइबर ठगों ने NSP पोर्टल की खामियों का फायदा उठाकर शैक्षणिक संस्थानों की फर्जी आईडी बनाई और उनके माध्यम से छात्रवृत्ति के आवेदन भरे। आवेदन प्रक्रिया में यह खामी थी कि छात्र जहां का भी हो, आवेदन का वेरिफिकेशन उसी जिले के अधिकारी द्वारा होता था। इसका फायदा उठाकर ठगों ने विद्यार्थियों और संस्थानों दोनों को फर्जी बनाया और स्वयं वेरिफिकेशन कर दिए।
जांच में यह भी सामने आया कि जिन विद्यार्थियों के खातों में छात्रवृत्ति राशि जमा हुई, उनके बैंक खाते अलग राज्यों में थे जबकि IFSC कोड नागौर के बैंकों के थे। सामान्य रूप से ऐसा ट्रांजेक्शन संभव नहीं है, फिर भी करोड़ों रुपए डीबीटी के माध्यम से फर्जी खातों में भेजे गए। इसके बाद अधिकांश खाते बंद कर दिए गए।
राजस्थान सरकार ने सभी जिला कलक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को जांच के निर्देश दिए हैं। निदेशालय अल्पसंख्यक मामलात विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को फर्जीवाड़े की एफआईआर दर्ज कर सही कार्रवाई करने और रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इस मामले ने छात्रवृत्ति योजनाओं की प्रक्रिया और डिजिटल सुरक्षा में गंभीर खामियों को उजागर किया है।