नीमच-बांसवाड़ा-दाहोद-नंदुरबार रेल लाइन को मिली मंजूरी, आदिवासी क्षेत्रों के विकास को मिलेगी रफ्तार

Edited By Anil Jangid, Updated: 27 Mar, 2026 07:37 PM

neemuch banswara dahod nandurbar rail line dpr approved

बांसवाड़ा: दक्षिण राजस्थान और आदिवासी अंचलों के विकास के लिए एक बड़ी सौगात सामने आई है। नीमच–बांसवाड़ा–दाहोद–नंदुरबार नई रेल लाइन परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी मिल गई है। इस प्रस्तावित रेल लाइन को प्रतापगढ़ शहर के पास से...

बांसवाड़ा: दक्षिण राजस्थान और आदिवासी अंचलों के विकास के लिए एक बड़ी सौगात सामने आई है। नीमच–बांसवाड़ा–दाहोद–नंदुरबार नई रेल लाइन परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी मिल गई है। इस प्रस्तावित रेल लाइन को प्रतापगढ़ शहर के पास से गुजारे जाने की भी स्वीकृति दी गई है।

 

सीपी जोशी, जो चित्तौड़गढ़ से सांसद हैं, ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से उन्हें पत्र प्राप्त हुआ है, जिसमें इस परियोजना की प्रगति और एलाइनमेंट सर्वे के बारे में जानकारी दी गई है।

 

रेल मंत्री द्वारा पश्चिम रेलवे को निर्देश दिए गए हैं कि इस रेल लाइन को जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रतापगढ़ शहर के समीप से गुजारा जाए। इससे स्थानीय लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी।

 

करीब 380 किलोमीटर लंबी इस प्रस्तावित रेल लाइन से दक्षिण राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों को देश के प्रमुख रेलवे नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे पहली बार कई दूरदराज के इलाकों को रेल सुविधा मिल सकेगी, जिससे सामाजिक और आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी।

 

इस परियोजना के पूरा होने के बाद प्रतापगढ़, बांसवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में व्यापार और उद्योग को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। कच्चे और तैयार माल की ढुलाई आसान होगी, जिससे स्थानीय उद्योगों को नए बाजार मिलेंगे। इसके साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

 

रेल लाइन के निर्माण और संचालन से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों लोगों को रोजगार मिलने की संभावना जताई जा रही है।

 

इसके अलावा, यह रेल मार्ग दिल्ली और मुंबई के बीच एक वैकल्पिक और छोटा मार्ग भी प्रदान कर सकता है, जिससे यातायात का दबाव कम होगा और यात्रा समय में कमी आएगी।

 

कुल मिलाकर, यह रेल परियोजना न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी, बल्कि आदिवासी अंचलों को मुख्यधारा से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

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