माइक्रोप्लास्टिक का बढ़ता खतरा: खाने-पीने की चीजों से शरीर तक पहुंच रहे प्लास्टिक कण

Edited By Anil Jangid, Updated: 13 Apr, 2026 07:39 PM

nagaur plastic particles reaching our bodies through food and drink

नागौर: नागौर जिले में बढ़ते माइक्रोप्लास्टिक के खतरे ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है। माइक्रोप्लास्टिक, जो 5 मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक कण होते हैं, अब न केवल पर्यावरण में बल्कि हमारे रोज़मर्रा के जीवन में भी समा गए हैं। वैज्ञानिकों...

नागौर: नागौर जिले में बढ़ते माइक्रोप्लास्टिक के खतरे ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है। माइक्रोप्लास्टिक, जो 5 मिलीमीटर से छोटे प्लास्टिक कण होते हैं, अब न केवल पर्यावरण में बल्कि हमारे रोज़मर्रा के जीवन में भी समा गए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, ये सूक्ष्म कण अब हवा, पानी, मिट्टी और खाद्य पदार्थों में पाए जा रहे हैं, जिससे इंसान इन्हें अनजाने में अपने शरीर में समाहित कर रहा है।

 

अध्ययनों से पता चला है कि माइक्रोप्लास्टिक बोतलबंद पानी, नल का पानी, बीयर, दूध, नमक, चीनी, शहद, चाय और प्रोसेस्ड फूड जैसे चिप्स, बिस्किट और फास्ट फूड में पाए गए हैं। इसके अलावा, समुद्री भोजन जैसे मछली, झींगा और शेलफिश भी प्लास्टिक प्रदूषण से प्रभावित हैं, क्योंकि ये कण समुद्र में फैलकर खाद्य शृंखला में प्रवेश कर जाते हैं।

 

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    इससे भी अधिक चिंताजनक तथ्य यह है कि माइक्रोप्लास्टिक मानव शरीर के विभिन्न हिस्सों में पहुंच चुके हैं। हालिया शोध में पाया गया है कि मानव रक्त, स्तन के दूध, फेफड़ों और भ्रूण उपास्थि ऊतकों में सूक्ष्म प्लास्टिक कण पाए गए हैं। एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 22 स्वस्थ वयस्कों के रक्त में माइक्रोप्लास्टिक की पुष्टि की है। यह शोध साबित करता है कि ये कण अब मानव शरीर में अवशोषित हो चुके हैं, जो एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है।

     

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रोप्लास्टिक शरीर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) उत्पन्न कर सकते हैं, जिससे क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, ये कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे डीएनए डैमेज और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस हो सकता है। कुछ शोधों में यह भी संकेत मिले हैं कि ये कण डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जो भविष्य में कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं।

     

    इस विषय पर शोध अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन विशेषज्ञ यह मानते हैं कि माइक्रोप्लास्टिक का शरीर में संचय स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। इससे बचाव के लिए विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्लास्टिक का उपयोग कम किया जाए। स्टील या कांच के बर्तनों का उपयोग, प्रोसेस्ड फूड से दूरी और ताजे खाद्य पदार्थों का सेवन माइक्रोप्लास्टिक के जोखिम को कम कर सकते हैं।

     

    डॉ. अशोक झाड़वाल, कन्सलटेंट फिजिशियन, जेएलएन अस्पताल, नागौर, के अनुसार, "माइक्रोप्लास्टिक का खतरा बढ़ता जा रहा है और इससे कैंसर जैसे गंभीर रोगों का जोखिम भी है। प्लास्टिक का कम से कम उपयोग हमारी सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है।"

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