Edited By Anil Jangid, Updated: 30 Mar, 2026 04:38 PM

करौली: राजस्थान के धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व में वन्यजीवन प्रेमियों और कैमरा टीम के लिए सोमवार को एक बेहद दुर्लभ और रोमांचक नजारा सामने आया। सरमथुरा क्षेत्र के रीछरा जंगल में मादा भालू अपने दो शावकों को पीठ पर बैठाकर जंगल में सैर करती नजर आई। इस...
करौली: राजस्थान के धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व में वन्यजीवन प्रेमियों और कैमरा टीम के लिए सोमवार को एक बेहद दुर्लभ और रोमांचक नजारा सामने आया। सरमथुरा क्षेत्र के रीछरा जंगल में मादा भालू अपने दो शावकों को पीठ पर बैठाकर जंगल में सैर करती नजर आई। इस दृश्य ने मां की ममता और सुरक्षा की भावना को जीवंत कर दिया।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, अक्सर शावक अपनी मां के पीछे-पीछे चलते हैं, लेकिन जब जंगल में अन्य जंगली जानवरों का खतरा महसूस होता है, तो मां शावकों को अपनी पीठ पर बैठा लेती है। इस फोटो में भी देखा जा सकता है कि एक शावक मां की पीठ के एक तरफ बैठा है, जबकि दूसरा शावक दूसरी ओर लटका हुआ है। यह दृश्य न केवल दुर्लभ है बल्कि वन्यजीवन में मातृत्व की भावना का शानदार उदाहरण प्रस्तुत करता है।
धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व और आसपास के संरक्षित क्षेत्रों में ग्रीष्मकालीन वाटर होल मॉनिटरिंग के आधार पर भालुओं की अनुमानित संख्या लगभग 25 बताई गई है। वन विभाग द्वारा लगातार मॉनिटरिंग और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत भालुओं की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। वन विहार सेंचुरी में अकेले ही 10 से 12 भालू दिन के समय भी देखे जाते हैं, जिससे वन्यजीवों की सामान्य जीवनशैली का पता चलता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि कई बार भालू केसरबाग के मिलिट्री स्कूल कैंपस में भी देखे जाते हैं, जहां ये हॉस्टल के बचे हुए भोजन की तलाश में आते हैं। स्कूल के कैमरों में भी भालुओं की गतिविधियां रिकॉर्ड होती रहती हैं। इस तरह की साइटिंग न केवल शोधकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि आम लोगों को वन्यजीवन और उसकी सुरक्षा के महत्व को समझाने में भी मदद करती है।
वन्यजीव प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए यह दृश्य किसी खजाने से कम नहीं था। मादा भालू की यह ममतामयी हरकत यह दर्शाती है कि जंगल में माता का संरक्षण और बच्चों की सुरक्षा किस तरह प्राथमिकता होती है। वन विभाग ने सभी पर्यटकों और जंगल भ्रमणकर्ताओं से अपील की है कि भालुओं के प्राकृतिक व्यवहार को शांतिपूर्ण रूप से देखें और उन्हें परेशान न करें।
इस अद्भुत नजारे ने धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व के वन्य जीवन की महत्ता और संरक्षण की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर किया।