मानवेंद्र सिंह जसोल ने RSS और पीएम मोदी पर कही बड़ी बात! डोटासरा और गहलोत को दी बड़ी सलाह

Edited By Anil Jangid, Updated: 27 Jun, 2026 12:24 PM

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जोधपुर: भाजपा नेता मानवेंद्र सिंह जसोल ने हाल ही में जोधपुर के सर्किट हाउस में जनसुनवाई की। इस दौरान उन्होंने आमजन की समस्याएं सुनीं और बाद में मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार के 12 वर्ष के कार्यकाल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रदेश की राजनीति...

जोधपुर: भाजपा नेता मानवेंद्र सिंह जसोल ने हाल ही में जोधपुर के सर्किट हाउस में जनसुनवाई की। इस दौरान उन्होंने आमजन की समस्याएं सुनीं और बाद में मीडिया से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार के 12 वर्ष के कार्यकाल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, प्रदेश की राजनीति और कांग्रेस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा कि देश को कैसा नेतृत्व चाहिए।

 

इसको लेकर जसोल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने सफल कार्यकाल देखा है। उनका कहना था कि देश और विदेश दोनों स्तरों पर कई चुनौतियां सामने आईं, विशेष रूप से खाड़ी क्षेत्र में हुए युद्ध जैसी परिस्थितियों में मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि भारत को प्रधानमंत्री मोदी जैसा नेतृत्व मिला है और उन्हें विश्वास है कि आगे भी देश को उनका मार्गदर्शन मिलता रहेगा।

 

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने हाल ही में एक बयान दिया था कि राजस्थान सरकार आरएसएस चला रहा है, इस पर जसोल ने कहा कि जो लोग संघ की कार्यशैली और परंपरा से परिचित हैं, वे जानते हैं कि आरएसएस का मुख्य कार्य सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भावना को गांव-ढाणी तक पहुंचाना और भारत की संस्कृति एवं परंपराओं का प्रचार-प्रसार करना है। उन्होंने कहा कि सरकार चलाना या उसमें हस्तक्षेप करना संघ का कार्य नहीं है।

 

राजस्थान में भाईचारे को लेकर पूछे गए सवाल पर जसोल ने कहा कि जहां भी आपसी मेल-मिलाप और भाईचारे में कमी आती है, वह चिंता का विषय होता है। चाहे राजनीति हो, गांव की चौपाल हो या पंचायत, सभी को मतभेदों से ऊपर उठकर राजस्थान की भाईचारे और प्रेम की परंपरा को बनाए रखना चाहिए।

 

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के परिवार पर लगे आरोपों के संबंध में भी जसोल ने कहा कि ऐसे आरोप पहले भी लग चुके हैं। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं को इस विषय पर आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी का उदाहरण देते हुए कहा कि जैन डायरी मामले में आडवाणी ने स्वयं चुनाव नहीं लड़ने और कोई पद नहीं लेने का निर्णय किया था, जब तक उन्हें पूरी तरह क्लीन चिट नहीं मिल गई। जसोल ने कहा कि जिन नेताओं पर गंभीर आरोप लगते हैं, उन्हें भी वैसी ही राजनीतिक मर्यादा का पालन करना चाहिए।

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