Edited By Ishika Jain, Updated: 22 Oct, 2026 04:28 PM
मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग तेज। आयोजकों के अनुसार, देशभर के 400 जिलों में ज्ञापन सौंपकर गोविंद गुरु और जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को राष्ट्रीय पहचान देने की मांग की गई।
बांसवाड़ा/जयपुर। राजस्थान के बांसवाड़ा स्थित ऐतिहासिक मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से गुरुवार को देशव्यापी अभियान चलाया गया। राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद, वनवासी कल्याण आश्रम और संबंधित संगठनों की ओर से देशभर के 400 जिलों में ज्ञापन सौंपे जाने का दावा किया गया। इस अभियान के तहत केंद्र और राज्य सरकारों से मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने तथा इसके संरक्षण और विकास के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग की गई।
गोविंद गुरु के नेतृत्व में चला था भगत आंदोलन
ज्ञापन में मानगढ़ धाम को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का महत्वपूर्ण स्थल बताया गया। आयोजकों के अनुसार, गोविंद गुरु के नेतृत्व में चले भगत आंदोलन ने जनजातीय समाज में सामाजिक सुधार, स्वाभिमान, एकता और राष्ट्रीय चेतना को बढ़ावा दिया।
17 नवंबर 1913 को मानगढ़ पहाड़ी पर अंग्रेजी शासन की गोलीबारी में बड़ी संख्या में जनजातीय महिला, पुरुष और अन्य आंदोलनकारियों की जान गई थी। इस घटना को मानगढ़ नरसंहार के नाम से जाना जाता है। आयोजकों का कहना है कि जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के इस बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान मिलनी चाहिए।
मानगढ़ धाम का ऐतिहासिक महत्व राजस्थान तक सीमित नहीं है। यह गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित आसपास के क्षेत्रों के जनजातीय समुदायों की साझा विरासत से भी जुड़ा हुआ है। इसी आधार पर इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग उठाई जा रही है।
PM मोदी और राष्ट्रपति के दौरे का दिया हवाला
अभियान के तहत सौंपे गए ज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 1 नवंबर 2022 को मानगढ़ धाम की यात्रा का उल्लेख किया गया। आयोजकों ने कहा कि इस यात्रा के दौरान मानगढ़ की ऐतिहासिक विरासत और विभिन्न राज्यों के जनजातीय समाज के योगदान को रेखांकित किया गया था।
ज्ञापन में राष्ट्रपति के 4 अक्टूबर 2024 के मानगढ़ धाम दौरे का भी हवाला दिया गया, जब उन्होंने जनजातीय बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी थी। इसके साथ ही राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की अनुशंसा और अगस्त 2022 में प्रस्तुत शोध-आधारित रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए मानगढ़ पहाड़ी को राष्ट्रीय स्तर पर उचित ऐतिहासिक पहचान देने की आवश्यकता जताई गई।
बांसवाड़ा सहित राजस्थान के कई जिलों में प्रदर्शनात्मक पहल
देशव्यापी अभियान के तहत राजस्थान में बांसवाड़ा सहित विभिन्न जिलों में जिला कलेक्टरों और उपखंड अधिकारियों के माध्यम से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्रियों के नाम ज्ञापन सौंपे गए।
बांसवाड़ा में जिला कलेक्टर को ज्ञापन देने के दौरान जनजातीय सुरक्षा मंच के प्रदेश संयोजक लालूराम कटारा, जिला अध्यक्ष लालशंकर निनामा, प्रांतीय सह हित रक्षा प्रमुख जगदीश वैष्णव, अधिवक्ता विवेक रावत, जिला संगठन मंत्री रमेशचंद्र चरपोटा और सह जिला संगठन मंत्री वालम गणावा सहित सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि, संत-महात्मा और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इसी क्रम में उदयपुर जिला कलेक्टर को भी ज्ञापन सौंपा गया। कुशलगढ़ में उपखंड अधिकारी के माध्यम से मांग उठाई गई। आयोजकों के अनुसार, बारां सहित राजस्थान के अन्य क्षेत्रों में भी इस अभियान के तहत ज्ञापन देकर मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग की गई।
संरक्षण और विकास के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने की मांग
ज्ञापन के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की गई कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने पर शीघ्र निर्णय लिया जाए। इसके साथ ही स्थल के ऐतिहासिक तथ्यों के दस्तावेजीकरण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए।
अभियान से जुड़े संगठनों ने जनप्रतिनिधियों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों और समाज के विभिन्न वर्गों से भी इस मांग के समर्थन में एकजुट होने की अपील की।
आयोजकों का मानना है कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलने से जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को व्यापक पहचान मिलेगी और आने वाली पीढ़ियों को उनके संघर्ष, बलिदान, स्वाभिमान और देशभक्ति से प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा। फिलहाल, राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर सौंपे गए ज्ञापनों पर सरकार की ओर से आगे की कार्रवाई का इंतजार है।