जोधपुर में 11 मार्च और 29 जुलाई को स्थानीय अवकाश घोषित, शीतला अष्टमी और गुरु पूर्णिमा पर रहेगा सरकारी अवकाश

Edited By Anil Jangid, Updated: 05 Mar, 2026 05:51 PM

local holiday announced in jodhpur on march 11

जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर शहर में आगामी धार्मिक आयोजनों और मेलों को देखते हुए जिला प्रशासन ने दो स्थानीय सार्वजनिक अवकाश घोषित किए हैं। जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, शहर में शीतला अष्टमी और गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सरकारी...

जोधपुर: राजस्थान के जोधपुर शहर में आगामी धार्मिक आयोजनों और मेलों को देखते हुए जिला प्रशासन ने दो स्थानीय सार्वजनिक अवकाश घोषित किए हैं। जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, शहर में शीतला अष्टमी और गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सरकारी कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश रहेगा। प्रशासन के इस फैसले से उन हजारों श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी जो इन धार्मिक आयोजनों और मेलों में भाग लेने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।

 

आदेश के मुताबिक 11 मार्च को शीतला अष्टमी के अवसर पर जोधपुर शहर में स्थानीय अवकाश रहेगा। इस दिन कागा की पहाड़ियों में स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर में विशाल मेला लगता है। इसके अलावा आषाढ़ मास में आने वाली गुरु पूर्णिमा के अवसर पर 29 जुलाई को भी जिले में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।

 

जोधपुर के कागा क्षेत्र में स्थित शीतला माता का मंदिर मारवाड़ क्षेत्र के प्रमुख आस्था स्थलों में से एक माना जाता है। शीतला अष्टमी के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस मेले की विशेषता यह है कि इसमें केवल शहर के लोग ही नहीं बल्कि मारवाड़ के दूर-दराज ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग अपनी पारंपरिक वेशभूषा और लोक संस्कृति के साथ माता के दर्शन करने आते हैं। यह मेला शीतला अष्टमी से शुरू होकर अमावस्या तक चलता है।

 

जोधपुर में शीतला माता की पूजा अष्टमी के दिन किए जाने के पीछे एक ऐतिहासिक कारण भी बताया जाता है। वर्ष 1772 में महाराजा विजय सिंह के शासनकाल के दौरान उनके ज्येष्ठ पुत्र की मृत्यु चेचक बीमारी के कारण शीतला सप्तमी के दिन हो गई थी। इस घटना के बाद राजपरिवार और शहरवासियों ने शोक और श्रद्धा के चलते सप्तमी के बजाय अष्टमी के दिन माता की पूजा करने की परंपरा शुरू कर दी।

 

तब से आज तक मारवाड़ में शीतला अष्टमी के दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और माता को ठंडे पकवान यानी ‘बास्योड़ा’ का भोग लगाया जाता है। प्रशासन ने मेले के दौरान भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के विशेष इंतजाम करने के निर्देश भी जारी किए हैं।

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