अनार-अंगूर से भी महंगा बिक रहा नींबू, 15 दिन में 3 गुना तक उछले दाम

Edited By Anil Jangid, Updated: 30 Mar, 2026 05:24 PM

lemon prices skyrocket in swaimadhopur costlier pomegranate and grapes

सवाईमाधोपुर। गर्मी और त्योहारी सीजन के बीच नींबू की कीमतों ने आसमान छू लिया है। पिछले पखवाड़े में नींबू के भाव लगभग तीन गुना बढ़ गए हैं और अब यह अनार, अंगूर और नारंगी से भी महंगा बिक रहा है। जिले की बजरिया सब्जी मंडी में नींबू 200 रुपए प्रति किलो की...

सवाईमाधोपुर। गर्मी और त्योहारी सीजन के बीच नींबू की कीमतों ने आसमान छू लिया है। पिछले पखवाड़े में नींबू के भाव लगभग तीन गुना बढ़ गए हैं और अब यह अनार, अंगूर और नारंगी से भी महंगा बिक रहा है। जिले की बजरिया सब्जी मंडी में नींबू 200 रुपए प्रति किलो की दर से बिक रहा है।

 

फल विक्रेता लखन ने बताया कि आमतौर पर अंगूर 100 रुपए किलो, अनार 160 रुपए किलो और नारंगी 100 रुपए प्रति किलो बिकते हैं, लेकिन नींबू की कीमत अब इनसे अधिक हो गई है। घरों के अलावा होटल और ढाबों में भी नींबू का उपयोग घट गया है। होटल संचालक अब सलाद में नींबू कम इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं गन्ने के रस, शरबत और सब्जियों में भी इसकी मात्रा घटा दी गई है।

 

गर्मी के मौसम में नींबू का उपयोग शरीर में पानी बनाए रखने और ठंडे पेय जैसे शिकंजी, नींबू सोडा व शरबत बनाने में होता है। ऐसे में गर्मी बढ़ते ही मांग अचानक बढ़ गई। दूसरी ओर, जिले में नींबू का स्टॉक सीमित होने के कारण कीमतों में तेजी आई।

 

सवाईमाधोपुर जिले में मुख्य रूप से नींबू की बागवानी गोठबिहारी, नायपुर, उमरी, लालपुर, बामनबड़ौदा, करमोदा, सूरवाल, अजनोटी और जड़ावता जैसे गांवों में होती है। हालांकि, ये बागबानी स्थायी नहीं है और सीजन में ही नींबू की आवक होती है। गर्मियों में स्थानीय स्तर पर नींबू कम होने के कारण मंडियों में भी पर्याप्त स्टॉक नहीं पहुंच पाता।

 

फल विक्रेता घनश्याम माली, राकेश माली, गिर्राज और रवि ने बताया कि नींबू के भाव पिछले 15 दिन में 60-70 रुपए प्रति किलो से बढ़कर अब 200 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। मांग बढ़ने और त्योहारी सीजन में बाजार में नींबू की कमी के कारण अन्य शहरों जैसे हैदराबाद, जयपुर और कोटा से भी नींबू मंगवाया जा रहा है।

 

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी, कम उत्पादन और त्योहारी मांग के कारण नींबू की कीमतों में और भी वृद्धि हो सकती है। आम जनता और होटल संचालक अब इन ऊंची कीमतों के साथ ही अपने खर्चों और उपयोग को संतुलित करने के लिए मजबूर हैं।

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