लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ गद्दी पर विराजमान: मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच पूरी हुई पारंपरिक रस्में

Edited By Ishika Jain, Updated: 02 Apr, 2025 07:17 PM

lakshyaraj singh mewar ascended the throne

मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को उनके कुलगुरु डॉ. वागीश कुमार गोस्वामी ने विधिवत गद्दी पर बैठाया। इस अवसर पर मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच विभिन्न पारंपरिक रस्में निभाई गईं। एकलिंगनाथजी के दर्शन, अश्व पूजन और अन्य राजपरिवार...

मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ को उनके कुलगुरु डॉ. वागीश कुमार गोस्वामी ने विधिवत गद्दी पर बैठाया। इस अवसर पर मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच विभिन्न पारंपरिक रस्में निभाई गईं। एकलिंगनाथजी के दर्शन, अश्व पूजन और अन्य राजपरिवार की परंपराओं के साथ यह भव्य समारोह पूरा हुआ।

मेवाड़ राजवंश की समृद्ध परंपराओं के बीच डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ का गद्दी पर बैठने का भव्य समारोह बुधवार को संपन्न हुआ। उनके कुलगुरु डॉ. वागीश कुमार गोस्वामी ने मंत्रोच्चार और शंखनाद के बीच उन्हें विधिवत रूप से गद्दी पर बैठाया।

धार्मिक अनुष्ठान और आशीर्वाद

गद्दी पर विराजमान होने के बाद लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने अपने कुलगुरु और अन्य संत-महात्माओं का आशीर्वाद लिया। उन्होंने श्रीएकलिंगनाथ जी की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया और धूणी दर्शन किए। इस मौके पर अश्व पूजन (घोड़े की पूजा) भी किया गया, जो मेवाड़ राजपरिवार की एक महत्वपूर्ण परंपरा है।

सिटी पैलेस में अश्व पूजन की परंपरा

मेवाड़ राजवंश की प्राचीन परंपराओं के अनुसार, सिटी पैलेस के शंभू निवास में अश्व पूजन (घोड़े की पूजा) किया गया। लक्ष्यराज सिंह ने अपने बेटे हरितराज सिंह के साथ इस रस्म को निभाया। मंत्रोच्चार के साथ पूजन विधि संपन्न हुई।

घोड़ा मेवाड़ की राजशाही संस्कृति का प्रतीक माना जाता है, और यह परंपरा महाराणा प्रताप के वीर अश्व चेतक की महान गाथा को भी दर्शाती है, जिसने हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप को सुरक्षित बाहर निकाला था।

1500 वर्षों से चली आ रही परंपरा

मेवाड़ राजपरिवार की अश्वशाला (घोड़ों का अस्तबल) लगभग 1500 साल पुरानी परंपरा का हिस्सा रही है। वर्तमान अस्तबल सिटी पैलेस और शिकारबाड़ी में स्थित है, जिसे औपचारिक रूप से महाराणा करण सिंह (1620-1628 ईस्वी) ने विकसित किया था।

हवन-पूजन के साथ शुरू हुआ समारोह

इससे पहले सुबह 9:30 बजे सिटी पैलेस परिसर में हवन-पूजन का आयोजन हुआ। इस विशेष अवसर पर ओडिशा के डिप्टी सीएम और लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के ससुर कनकवर्धन सिंह, प्रसिद्ध कवि और अभिनेता शैलेश लोढ़ा सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

राजसी परंपरा के अनुसार, सभी लोग सफेद वस्त्रों में उपस्थित हुए। लक्ष्यराज सिंह ने भी सफेद परिधान में सभी रस्मों को विधि-विधान से पूरा किया। उनके पुत्र हरितराज सिंह मेवाड़ ने भी इस अवसर पर संतों का आशीर्वाद लिया।

एकलिंगनाथ जी मंदिर और तालाब पूजन

शाम 6 बजे कैलाशपुरी स्थित श्रीएकलिंगनाथ जी मंदिर में लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने विशेष पूजा-अर्चना की। इससे पहले उन्होंने तालाब पूजन भी किया। कैलाशपुरी की महिलाओं ने उन्हें मालाएं पहनाकर स्वागत किया, और जगह-जगह फूलों की वर्षा की गई। महिलाओं ने धार्मिक गीत गाकर इस ऐतिहासिक अवसर को और भव्य बना दिया।

रात्रि 9 बजे जगदीश मंदिर में होंगे दर्शन

शाम 7 बजे हाथीपोल द्वार का पूजन किया जाएगा, और रात 8:15 बजे भाईपा और सरदार रंगपलटाई दस्तूर की परंपरा निभाई जाएगी।

रात्रि 9 बजे लक्ष्यराज सिंह मेवाड़, जगदीश मंदिर में दर्शन करेंगे।

यह भव्य समारोह उनके पिता अरविंद सिंह मेवाड़ के निधन (16 मार्च) के बाद आयोजित किया गया, जिसमें मेवाड़ की गौरवशाली परंपराओं का पूर्ण रूप से पालन किया गया।

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