कोहला वन अग्निकांड पर उठे सवाल: उच्च स्तरीय जांच, पुनर्वनीकरण और वित्तीय ऑडिट की मांग

Edited By Ishika Jain, Updated: 17 Jun, 2026 04:36 PM

kohla forest fire high level probe demanded in hanumangarh

हनुमानगढ़ के कोहला संरक्षित वन क्षेत्र में लगी आग को लेकर उच्च स्तरीय जांच की मांग उठी है। सामाजिक संगठनों ने पुनर्वनीकरण, वित्तीय ऑडिट और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

हनुमानगढ़ जिले के कोहला स्थित संरक्षित वन क्षेत्र में हाल ही में हुई भीषण आग की घटना को लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों ने चिंता जताई है। इस मामले में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया है।

मां भद्रकाली क्षेत्र विकास सेवा समिति ने जिला कलेक्टर को दिए ज्ञापन में आग लगने के कारणों की उच्च स्तरीय जांच कराने, प्रभावित वन क्षेत्र का पुनर्विकास करने और वन संरक्षण कार्यों की समीक्षा कराने की मांग रखी है। समिति का दावा है कि आग से बड़े क्षेत्र में वन संपदा को नुकसान पहुंचा है, जिससे पर्यावरण और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

समिति पदाधिकारियों का कहना है कि आग की चपेट में आने से बड़ी संख्या में पेड़-पौधे नष्ट हो गए। साथ ही कई छोटे वन्यजीवों और पक्षियों के प्राकृतिक आवास भी प्रभावित हुए हैं। उनका मानना है कि इस तरह की घटनाएं क्षेत्र की पारिस्थितिकी के लिए गंभीर चुनौती बन रही हैं।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले कुछ वर्षों में गर्मी के मौसम के दौरान वृक्षारोपण क्षेत्रों में आग लगने की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। ऐसे में इन घटनाओं के पीछे के कारणों की गहराई से जांच की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों को रोका जा सके।

समिति ने वन विभाग द्वारा पौधारोपण और संरक्षण गतिविधियों पर किए गए खर्च की स्वतंत्र समीक्षा और वित्तीय ऑडिट कराने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि योजनाओं पर हुए व्यय और जमीनी स्तर पर प्राप्त परिणामों का मूल्यांकन आवश्यक है।

इसके अलावा आग की घटना की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने, आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू करने और प्रभावित क्षेत्र में वैज्ञानिक पद्धति से पुनर्वनीकरण अभियान चलाने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

समिति ने आगामी मानसून सत्र के दौरान हनुमानगढ़ टाउन से मां भद्रकाली मंदिर तक जाने वाले मार्ग पर व्यापक पौधारोपण की आवश्यकता भी जताई। उनका कहना है कि हरित आवरण बढ़ाने से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ श्रद्धालुओं को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

ज्ञापन सौंपने के दौरान समिति के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कई लोग मौजूद रहे।

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