Edited By Anil Jangid, Updated: 26 Sep, 2026 05:35 PM

जयपुर। राजस्थान के सीकर जिले में विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी खाटूश्यामजी में ऐसा चमत्कार हुआ है जिसके बारे में जानकर हर कोई हैरान हो रहा है। दरअसल, यहां की नगरपालिका में अध्यक्ष पद को लेकर पिछले चल रही सियासी उठापटक आखिरकार खत्म हो गई।
जयपुर। राजस्थान के सीकर जिले में विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी खाटूश्यामजी में ऐसा चमत्कार हुआ है जिसके बारे में जानकर हर कोई हैरान हो रहा है। दरअसल, यहां की नगरपालिका में अध्यक्ष पद को लेकर पिछले चल रही सियासी उठापटक आखिरकार खत्म हो गई। क्योंकि हाईकोर्ट के निर्देश के बाद निर्वाचन आयोग ने 21 सितंबर को डाले गए 19 मतों की मतगणना कराई, जिसमें कांग्रेस की विनीता पूनियां ने भाजपा की प्रेम देवी को एक वोट से शिकस्त देकर पालिकाध्यक्ष की कुर्सी पर कब्जा जमा लिया। विनीता पूनियां को 10 वोट मिले, जबकि भाजपा प्रत्याशी प्रेम देवी के खाते में 9 वोट आए।
दरअसल, खाटूश्यामजी नगरपालिका के अध्यक्ष पद का यह चुनाव शुरुआत से ही बेहद रोमांचक रहा। 21 सितंबर को मतदान के दौरान 20 पार्षदों में से 19 ने अपने मत का इस्तेमाल किया, लेकिन वार्ड नंबर 10 की पार्षद लक्ष्मी देवी मतदान केंद्र पर नहीं पहुंचीं। मतदान का समय कई बार बढ़ाया गया और देर रात तक इंतजार के बावजूद उनके नहीं पहुंचने पर मतदान प्रक्रिया रोक दी गई। 19 मतों वाली मतपेटी को सील कर सुरक्षित रख दिया गया और परिणाम रोक दिया गया। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा। विनीता पूनियां की ओर से दायर याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट ने 21 सितंबर को डाले गए 19 मतों की ही गणना कर परिणाम जारी करने के निर्देश दिए। आदेश की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शनिवार को निर्वाचन विभाग ने मतगणना कराई और पांच दिन से अटका परिणाम सामने आ गया।
इसके बाद शनिवार सुबह रिटर्निंग अधिकारी कपिल उपाध्याय की निगरानी में भारी पुलिस जाब्ते के साथ मतपेटी को स्ट्रांग रूम से नगरपालिका लाया गया। पूरी मतगणना की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई। इसके बाद 19 मतों की गिनती हुई और कांग्रेस प्रत्याशी विनीता पूनियां को 10 वोट मिलने पर उन्हें विजयी घोषित किया गया। भाजपा प्रत्याशी प्रेम देवी को 9 वोट मिले। खास बात यह रही कि मतगणना के दौरान दोनों प्रत्याशियों में से कांग्रेस की विनीता पूनियां मौजूद रहीं, जबकि भाजपा प्रत्याशी प्रेम देवी मतगणना स्थल पर नहीं पहुंचीं।
खाटूश्यामजी नगरपालिका में कुल 20 पार्षद हैं। इनमें कांग्रेस के 8, भाजपा के 8, निर्दलीय 3 और आरएलपी का एक पार्षद है। ऐसे में अध्यक्ष पद के चुनाव में एक-एक वोट बेहद महत्वपूर्ण था। वार्ड नंबर 10 की पार्षद लक्ष्मी देवी के मतदान नहीं करने के कारण मुकाबला और भी पेचीदा हो गया था। आखिरकार 19 मतों की गिनती में कांग्रेस को 10 और भाजपा को 9 वोट मिलने से तस्वीर साफ हो गई।
21 सितंबर को मतदान के दिन लक्ष्मी देवी के मतदान केंद्र नहीं पहुंचने के बाद उनके पति ने पुलिस में शिकायत देकर अपहरण की आशंका जताई थी। पुलिस ने तलाश के बाद लक्ष्मी देवी को दस्तयाब करने का दावा किया था। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चला।
21 सितंबर के बाद 25 सितंबर को अध्यक्ष पद का चुनाव और 26 सितंबर को उपाध्यक्ष पद का चुनाव प्रस्तावित था। लेकिन हाईकोर्ट के आदेश और उसकी प्रमाणित प्रति निर्वाचन विभाग तक पहुंचने की प्रक्रिया के चलते चुनाव कार्यक्रम में बदलाव हुआ। अंततः शनिवार को पुराने 19 मतों की गणना कर परिणाम घोषित कर दिया गया।