करौली में हरियाली का महाकुंभ! 22 लाख पौधों से सजेगी धरती, जानिए प्रशासन का क्या है 'सर्वाइवल' प्लान और किन विभागों को मिली जिम्मेदारी

Edited By Anil Jangid, Updated: 19 Mar, 2026 05:11 PM

karauli s green revolution 22 lakh plants to be planted

करौली: राजस्थान के करौली जिले में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। इस वर्ष मानसून के दौरान जिला प्रशासन ने ‘हरियालो राजस्थान’ महाअभियान के तहत जिले में 22 लाख से अधिक पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

करौली: राजस्थान के करौली जिले में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। इस वर्ष मानसून के दौरान जिला प्रशासन ने ‘हरियालो राजस्थान’ महाअभियान के तहत जिले में 22 लाख से अधिक पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विजन को साकार करने के लिए जिला कलेक्ट्रेट में उच्च स्तरीय बैठकों का सिलसिला शुरू हो चुका है। इस अभियान का उद्देश्य न केवल वृक्षारोपण करना है, बल्कि जिले के वन क्षेत्र को बढ़ाकर पारिस्थितिकी संतुलन को भी मजबूत करना है।

 

जिला प्रशासन ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए सभी प्रमुख विभागों को सक्रिय किया है। अतिरिक्त जिला कलेक्टर हेमराज परिडवाल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में प्रमुख विभागों को लक्ष्य आवंटित किया गया है। इसमें शिक्षा, चिकित्सा, जल संसाधन, कृषि और नगर परिषद जैसे विभाग शामिल हैं। एडीएम ने इस बार स्पष्ट किया कि पौधारोपण केवल कागजी आंकड़ों या रस्म अदायगी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे जमीन पर वास्तविकता में उतारा जाएगा। मानसून की पहली फुहार के साथ ही पौधों का रोपण सुनिश्चित करने के लिए गड्ढे तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

 

इस अभियान में पौधों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। अक्सर देखा जाता है कि पौधों की देखभाल की कमी के कारण वे मुरझा जाते हैं या मवेशी उन्हें नुकसान पहुंचाते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए इस बार प्रशासन ने ‘प्लांटेशन’ के साथ ‘प्रोटेक्शन’ (Protection) की रणनीति अपनाई है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जहां भी पौधारोपण किया जाए, वहां पानी की व्यवस्था और तारबंदी सुनिश्चित की जाए। इसके अलावा, ब्लॉक स्तर पर टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा, जो हर महीने पौधों की प्रगति रिपोर्ट जिला मुख्यालय को भेजेगी।

 

वन विभाग की नर्सरियों में पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है, जिसमें फलदार, छायादार और औषधीय पौधों को प्राथमिकता दी गई है। प्रशासन इस अभियान को एक जन आंदोलन के रूप में बदलने की योजना बना रहा है, जिसमें समाजिक संगठनों और नागरिकों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा। ग्राम पंचायत स्तर पर नरेगा के माध्यम से गड्ढे खुदवाने और पौधों की देखरेख के लिए ‘वन रक्षक’ नियुक्त करने की संभावना पर भी चर्चा की गई। इस महाअभियान के माध्यम से करौली को प्राकृतिक सुंदरता और स्वच्छ वातावरण की नई सौगात मिलने की उम्मीद है।

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