हिंदुस्तान जिंक ने 1,105 हेक्टेयर भूमि को किया पुनर्स्थापित, 2020 से लगाए 8.5 लाख पौधे

Edited By Sourabh Dubey, Updated: 26 Sep, 2026 01:31 PM

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हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार खनन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अब तक 1,105 हेक्टेयर भूमि का पुनर्वास और पुनर्स्थापन किया है। कंपनी के अनुसार यह क्षेत्रफल 1,500 से अधिक फुटबॉल मैदानों के बराबर है।

उदयपुर। हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार खनन की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अब तक 1,105 हेक्टेयर भूमि का पुनर्वास और पुनर्स्थापन किया है। कंपनी के अनुसार यह क्षेत्रफल 1,500 से अधिक फुटबॉल मैदानों के बराबर है।

कंपनी की ओर से बताया गया कि भूमि पुनर्वास, पौधरोपण, जैव विविधता संरक्षण और टिकाऊ भूमि उपयोग के जरिए खनन एवं परिचालन क्षेत्रों में प्राकृतिक पर्यावरण को पुनर्जीवित करने का काम किया जा रहा है। ये प्रयास कंपनी के सस्टेनेबिलिटी गोल्स 2030 का हिस्सा हैं।

2020 से 8.5 लाख पौधरोपण

हिंदुस्तान जिंक ने वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2026 तक करीब 8.5 लाख पौधे लगाए हैं। इनमें अकेले वित्त वर्ष 2026 में 1.14 लाख पौधे लगाए गए। राजपुरा दरीबा, चंदेरिया, देबारी और कायड़ में मियावाकी पद्धति से पौधरोपण किया गया है।

इसके अलावा ग्रीन जावर पहल के जरिए आसपास के समुदायों में हरित विकास और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

250 हेक्टेयर में इकोलॉजिकल रिस्टोरेशन

कंपनी ने टेरी (TERI) के साथ साझेदारी में चंदेरिया स्थित स्मेल्टर परिसर में 250 हेक्टेयर की पारिस्थितिक पुनर्स्थापन परियोजना पर काम शुरू किया है। परियोजना के तहत जारोफिक्स यार्ड के पुनर्वास के साथ प्राकृतिक वन विकास पर भी काम किया जा रहा है।

हिंदुस्तान जिंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमरेंदु प्रकाश ने कहा कि भविष्य का खनन केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन से भी उसकी पहचान होगी। उन्होंने कहा कि भूमि पुनर्वास, जल संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी कंपनी की कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा हैं।

3.32 गुना वॉटर पॉजिटिव कंपनी

जल संरक्षण के क्षेत्र में भी कंपनी ने प्रगति का दावा किया है। हिंदुस्तान जिंक के अनुसार कंपनी अब 3.32 गुना वॉटर पॉजिटिव संगठन के रूप में प्रमाणित है, जो पहले 2.41 गुना था।

राजस्थान जैसे जल संकट वाले क्षेत्र में संचालन के बावजूद कंपनी अपनी कुल जल आवश्यकता का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रिसाइकल किए गए सीवेज जल से पूरा करती है। कंपनी की सभी इकाइयों में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रणाली का पालन किया जाता है।

सस्टेनेबिलिटी गोल्स 2030 के तहत कंपनी ने वर्ष 2020 के आधार स्तर की तुलना में शुद्ध जल खपत में 50 प्रतिशत कमी लाने और स्मेल्टर संचालन में 100 प्रतिशत निम्न गुणवत्ता वाले जल के इस्तेमाल का लक्ष्य निर्धारित किया है।

2026 में ऊर्जा खपत का 18% हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा

कार्बन उत्सर्जन में कमी के प्रयासों के तहत वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की कुल ऊर्जा खपत में करीब 18 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय ऊर्जा का रहा। कंपनी ने वित्त वर्ष 2028 तक इसे 70 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए कंपनी ने 530 मेगावाट रिन्यूएबल एनर्जी के लिए एमओयू किया है।

हिंदुस्तान जिंक ने वर्ष 2030 तक अपने स्कोप-1 और स्कोप-2 उत्सर्जन में 50 प्रतिशत तथा स्कोप-3 उत्सर्जन में 25 प्रतिशत कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। कंपनी वर्ष 2050 या उससे पहले नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने की दिशा में भी काम कर रही है।

75% कम कार्बन फुटप्रिंट वाला 'इकोजेन'

कंपनी ने हाल ही में एशिया का पहला लो-कार्बन जिंक 'इकोजेन' लॉन्च करने की जानकारी दी है। कंपनी के अनुसार इसका कार्बन फुटप्रिंट वैश्विक औसत की तुलना में 75 प्रतिशत कम है।

हिंदुस्तान जिंक का कहना है कि भूमि पुनर्वास, जल संरक्षण, जैव विविधता, नवीकरणीय ऊर्जा और कम-कार्बन उत्पादों से जुड़े ये प्रयास कंपनी की दीर्घकालिक पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं का हिस्सा हैं।

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