हाईवे पर 'रेडियम पट्टी' के नाम पर चल रहा था वसूली का खेल, डूंगरपुर पुलिस ने 8 सदस्यीय गैंग दबोचा

Edited By Sourabh Dubey, Updated: 31 Jul, 2026 06:11 PM

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राजस्थान के डूंगरपुर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहन चालकों से रेडियम पट्टी लगाने के नाम पर अवैध वसूली करने वाले एक संगठित गिरोह का जिला पुलिस की विशेष टीम (DST) ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

डूंगरपुर। राजस्थान के डूंगरपुर जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहन चालकों से रेडियम पट्टी लगाने के नाम पर अवैध वसूली करने वाले एक संगठित गिरोह का जिला पुलिस की विशेष टीम (DST) ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 21 हजार रुपये नकद, एक अर्टिगा कार, फर्जी रसीदें, रेडियम पट्टियां, मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद किया गया है।

'तीसरी आंख' पर मिली सूचना, DST ने बिछाया जाल

पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के अनुसार पुलिस के "तीसरी आंख" मोबाइल नंबर पर सूचना मिली थी कि कुछ लोग उदयपुर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर रात के समय वाहनों को रोककर रेडियम पट्टी लगाने के बहाने अवैध वसूली कर रहे हैं। सूचना के आधार पर डीएसटी टीम को बिछीवाड़ा थाना क्षेत्र के रतनपुर पुलिस चौकी के पास भेजा गया।

मौके पर निगरानी के दौरान टीम ने देखा कि रिफ्लेक्टिव जैकेट पहने कुछ लोग टॉर्च की मदद से वाहनों को रोक रहे थे और खुद को अधिकृत एजेंसी का कर्मचारी बताकर वाहन चालकों से 100 से 300 रुपये तक वसूल रहे थे।

पुलिस ने ग्राहक बनकर किया खुलासा

गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस ने अपनी निजी गाड़ी को सामान्य वाहन की तरह मौके पर भेजा। आरोपियों ने वाहन रोककर चालक पर 300 रुपये देकर रेडियम पट्टी लगवाने का दबाव बनाया। जब चालक ने मना किया तो उसे वाहन जब्त कराने की धमकी दी गई और दो माह की वैधता वाली फर्जी रसीद थमा दी गई।

इसके तुरंत बाद पहले से घेराबंदी कर रही डीएसटी और रतनपुर चौकी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी आठ आरोपियों को मौके से गिरफ्तार कर लिया।

कोई सरकारी अनुमति नहीं मिली

पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों के पास रेडियम पट्टी लगाने या वसूली करने संबंधी कोई सरकारी अनुमति या पंजीकरण नहीं था। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्हें दिल्ली निवासी एक व्यक्ति ने इस काम के लिए भेजा था।

प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह सुनियोजित तरीके से रात में हाईवे पर गुजरने वाले वाहनों को रोकता था और सरकारी कार्रवाई का डर दिखाकर जबरन पैसे वसूलता था। विरोध करने वाले वाहन चालकों को वाहन जब्त कराने की धमकी भी दी जाती थी।

नकदी, फर्जी रसीदें और कार जब्त

तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 21 हजार रुपये नकद, विभिन्न राशि की फर्जी रसीदें, रेडियम पट्टियां, मोबाइल फोन तथा वारदात में प्रयुक्त अर्टिगा कार जब्त की है।

पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही गिरोह के मुख्य संचालक और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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