हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय जयपुर का तृतीय दीक्षांत समारोह सम्पन्न

Edited By Anil Jangid, Updated: 25 Mar, 2026 08:44 PM

haridev joshi university of journalism third convocation ceremony in jaipur

जयपुर। राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय जयपुर के तृतीय दीक्षांत समारोह में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से सरकार और समाज के बीच सेतु बन सत्य, निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का...

जयपुर। राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय जयपुर के तृतीय दीक्षांत समारोह में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने पत्रकारों से सरकार और समाज के बीच सेतु बन सत्य, निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया है। उन्होंने युवा पत्रकारों से कहा कि वे “सबसे पहले नहीं, सबसे सही बताने की होड़ में रहें।” 

 

पत्रकारिता धर्म निभाने की अपील की
देवनानी ने इस तृतीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित किया। उन्होंने पत्रकारों से विश्व के समक्ष आसन्न वर्तमान संकट में अपनी जिम्मेदारियों को समझने और राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ पत्रकारिता धर्म निभाने की अपील की। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित इस गरिमामय समारोह की अध्यक्षता राजस्थान के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने की। राज्य के उप मुख्यमंत्री एवं उच्च-तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा समारोह के विशिष्ट अतिथि थे। समारोह में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नन्दकिशोर पाण्डेय सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

 

दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं
समारोह को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि देश और समाज का भावी पत्रकारों के प्रति विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता एक पेशा नहीं, बल्कि सत्य और समाज के प्रति समर्पण का माध्यम है। उन्होंने युवा पत्रकारों का आह्वान किया गया कि वे “सबसे पहले” खबर देने की बजाय “सबसे सही” खबर बताने को प्राथमिकता दें।

 

लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ है मीडिया 
विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जो सरकार और समाज के बीच सेतु का कार्य करता है। उन्होंने 1975 में देश में लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में प्रेस ने सेंसरशिप के विरोध में अपने संपादकीय कॉलम को काले बॉर्डर में खाली छोड़कर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा का साहसिक उदाहरण प्रस्तुत किया था। बाद में इसमें लोकतन्त्र को  ही विजय मिली । उन्होंने पत्रकारों से कहा कि “ आप अपनी कलम की ताकत को पहचानिए, क्योंकि यह केवल शब्द नहीं लिखती, बल्कि इतिहास रचती है।”

 

डिजिटल युग में बढ़ी जिम्मेदारी 
वर्तमान डिजिटल युग का उल्लेख करते हुए देवनानी ने कहा कि आज सूचना का प्रवाह अत्यंत तेज हो गया है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। हालांकि, इसके साथ “फेक न्यूज़” और “दुष्प्रचार” और “मिथ्या प्रचार” जैसी गंभीर चुनौतियां भी सामने आई हैं। ऐसे में मीडिया की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि एक गलत खबर समाज के विश्वास को गहरा आघात पहुंचाती है।

 

स्वतंत्रता संग्राम में पत्रकारिता का योगदान
स्वतंत्रता आंदोलन में पत्रकारों की भूमिका को रेखांकित करते हुए देवनानी ने गणेश शंकर विद्यार्थी, बाल गंगाधर तिलक, राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर जैसे महान नेताओं का जो पत्रकार भी थे, उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में पत्रकारिता जनजागरण और स्वतंत्रता आंदोलन का सशक्त माध्यम थी। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पत्रकारिता से जुड़े होने का जिक्र किया। विशेष कर आकाशवाणी पर प्रसारित किए जाने वाले प्रधानमंत्री मोदी के “मन की बात” कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि मीडिया केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त उपकरण भी है। उन्होंने राजस्थान में पत्रकारिता को आगे बढ़ाने में विजय सिंह पथिक, कर्पूर चंद कुलिश और नारायण बारहट जैसे मुर्घन्य पत्रकारों के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि ये सभी सत्य पर टिके रह कर और निष्पक्ष भाव से अपनी पत्रकारिता के माध्यम से राजनीतिक और सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनें।


तकनीक के साथ नैतिकता भी जरूरी
विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने कहा कि आज “मोबाइल जर्नलिज्म”, “सिटिजन जर्नलिज्म” और “सोशल मीडिया” के बढ़ते प्रभाव के बीच प्रशिक्षित पत्रकार की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक केवल माध्यम है, जबकि पत्रकारिता की असली ताकत उसकी विश्वसनीयता और नैतिकता में निहित है। देवनानी ने पत्रकारों से कहा कि समाज को केवल नकारात्मक खबरों की नहीं, बल्कि सकारात्मक और समाधान आधारित पत्रकारिता की आवश्यकता है। मीडिया को अनुशासन में रह कर और आत्म परीक्षण कर ऐसी खबरें प्रस्तुत करनी चाहिए जो समाज को जोड़ें, उसें जागरूक करें और नागरिकों को प्रेरणा दें।

 

संसदीय पत्रकारिता को पाठ्यक्रम में शामिल करें
विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने  पत्रकारिता विश्वविद्यालयों को सुझाव दिया कि वे संसदीय पत्रकारिता को भी अपने पाठ्यक्रम में शामिल करें ताकि भावी पत्रकार लोकतन्त्र के प्रहरी बन कर विधायी कार्यवाही के कवरेज और जन प्रतिनिधियों द्वारा संसदीय मंचों पर उठाई जाने वाली आवाज एवं जनहित के मुद्दों को जनता के सामने सही ढंग से प्रस्तुत करने में सक्षम बन सकें। उन्होंने कहा कि कई बार अध्यक्ष कतिपय आपत्तिजनक शब्दों को सदन में कार्यवाही से हटाने के निर्देश देते है। पत्रकारों को विधायी कार्यवाही के ऐसे अंशों को नहीं छापना चाहिए और आचार संहिता का पालन करना चाहिए।

 

देवनानी ने भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए और भारतीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के समृद्ध साहित्य को आगे बढ़ाने में योगदान देना चाहिए।देवनानी ने पत्रकारिता के विद्यार्थियों से कहा कि वे अपने पेशे को केवल नौकरी न समझें, बल्कि इसे एक मिशन बनाएं। सत्य, निष्पक्षता और साहस को अपना मूल मंत्र बनाते हुए समाज और राष्ट्र के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। देवनानी ने डिग्री प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों,उनके अभिभावकों और गुरुजनों  को बधाई और शुभकामनाएँ दी ।

 

गलत इतिहास को सही कर उसके पुनर्लेखन का सही समय
समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि यह सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण और गलत इतिहास को सही कर उसके पुनर्लेखन का सही समय है । उन्होंने कहा कि भावी पीढ़ियों को सही इतिहास बताने की जिम्मेदारी पत्रकारों की वर्तमान पीढ़ी की है क्योंकि वर्तमान में वे किसी दवाब में आए बिना देश के सामने सही इतिहास लिखने की जिम्मेदारी का निर्वहन कर सकते है। उन्होंने वीर सावरकर जी और बीकानेर की वीरांगना किरणदेवी का उल्लेख करते हुए कहा कि पत्रकारिता से जुड़ी वर्तमान पीढ़ी के कन्धों पर इतिहास के सही तथ्यों को आम अवाम के सामने लाने की जिम्मेदारी है। राज्यपाल ने ब्रेकिंग और सनसनी फैलाने वाली खबरों से परहेज करने का सुझाव भी दिया। साथ ही रामायण, महा भारत और श्रीमद भागवत जैसी कालजयी रचनाओं को नैतिक ज्ञान और आध्यात्मिकता दृष्टि से  घर घर पहुँचाने की जरूरत पर बल दिया। राज्यपाल बागडे ने राजस्थान में पत्रकारिता के उद्भव और अब तक की यात्रा को बढ़ाने में योगदान करने वाले मुर्घन्य पत्रकारों के नामों का जिक्र भी किया।


ज्ञान को अपडेट करते हुए आगे बढ़ना चाहिए
समारोह के विशिष्ट अतिथि राजस्थान  के उप मुख्यमंत्री और उच्च तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेम चंद बैरवा ने कहा कि पत्रकार समाज के दर्पण लोकतन्त्र के सजग प्रहरी और जन चेतना तथा सामाजिक न्याय के वाहक एवं समाज के दबे हुए वर्ग को न्याय दिलाने में सहभागी बने। साथ ही पत्रकारों हर दिन अपने ज्ञान को अपडेट करते हुए आगे बढ़ना चाहिए।

विश्वविद्यालय अपने स्थाई परिसर में शिफ्ट हुआ
समारोह के प्रारम्भ में विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. नन्दकिशोर पाण्डेय ने बताया कि विश्वविद्यालय अपने स्थाई परिसर में शिफ्ट हो गया हैं और यह नया परिसर आधुनिक संसाधनों से संपन्न है। राजस्थान में पत्रकारिता और जनसंचार का यह एक मात्र विश्वविद्यालय है और यहां से निकले हुए कई मेधावी विद्यार्थी देश के जाने-माने मीडिया संस्थानों में काम कर रहे हैं और अनेक अपना मीडिया स्टार्टअप भी शुरू कर रहें है। 

 

विद्यार्थियों को दी गई डिग्रियां
समारोह में अतिथियों द्वारा वर्ष 2024 और 2025 में फाइनल परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले 271 पत्रकारिता के विद्यार्थियों को स्नातक और स्नातकोत्तर एवं विद्या वाचस्पति डिग्रियां प्रदान की गई। इसके अलावा, 35 छात्रों को मेरिट सर्टिफिकेट और 12 को गोल्ड मेडल दिए गए। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के कुल सचिव श्री लक्ष्मीनारायण शर्मा ने आभार व्यक्त किया।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!