भीलवाड़ा में ड्रोन से बरसेगी हरियाली! पहाड़ों पर सीड बॉल मिशन शुरू

Edited By Kuldeep Kundara, Updated: 27 Jul, 2026 01:47 PM

greenery to be showered via drones in bhilwara

भीलवाड़ा । पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र के विस्तार के लिए राजस्थान सरकार के वन विभाग ने एक अनूठी एवं आधुनिक तकनीक आधारित पहल शुरू की है।

भीलवाड़ा । पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र के विस्तार के लिए राजस्थान सरकार के वन विभाग ने एक अनूठी एवं आधुनिक तकनीक आधारित पहल शुरू की है। वनमण्डल भीलवाड़ा द्वारा जिले के दुर्गम और पथरीले पहाड़ी क्षेत्रों में हरित आवरण (ग्रीन कवर) बढ़ाने के उद्देश्य से ड्रोन तकनीक के माध्यम से बीजारोपण का कार्य किया गया है।

अभिनव पहल का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक तरीकों से जिन कठिन और पथरीले क्षेत्रों तक पहुंचना मानवीय रूप से चुनौतीपूर्ण होता है, वहां प्रभावी ढंग से विभिन्न पौधे लगाने और जैव विविधता को बढ़ावा देने के लिए ड्रोन का सहारा लिया गया है। इस नवाचार से कम समय में व्यापक और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में बीजारोपण संभव हो सका है।योजना के प्रमुख बिंदु और कार्य की रूपरेखा वित्तीय स्वीकृति एवं आवंटन: मुख्य वन संरक्षक, अजमेर के आदेशानुसार वनमण्डल भीलवाड़ा को इस आधुनिक बीजारोपण कार्य हेतु 1.50 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य आवंटित किया गया था। कार्य स्थल (Location): यह परियोजना फॉरेस्ट ब्लॉक पुर प्रथम (Forest Block Pur Pratham) के लगभग 18 हेक्टेयर विस्तृत पहाड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित की गई थी।

बीजारोपण का यह कार्य विशिष्ट भौगोलिक निर्देशांकों पर संपन्न किया गया।
बीज प्रजातियां एवं बीजारोपण विधि:क्षेत्र की जलवायु और पारिस्थितिकी (Ecology) को ध्यान में रखते हुए स्थानीय एवं उपयुक्त पौधों की प्रजातियों के बीजों का चयन किया गया।इनमें पलाश, रोहिड़ा, बेर, कुमठा, खैर, चुरैल, देशी बबूल और नीम जैसी मुख्य प्रजातियाँ शामिल हैं।इन बीजों को मिट्टी और पोषक तत्वों के मिश्रण के साथ 'सीड बॉल' (बीज चपटी) के रूप में तैयार किया गया, जिन्हें ड्रोन के जरिए चयनित पहाड़ियों पर सटीक रूप से गिराया/वितरित किया गया।

सफलतापूर्वक संपन्न
ड्रोन द्वारा बीजारोपण का यह संपूर्ण कार्य 22 जुलाई 2026 को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।भविष्य की राह और पर्यावरणीय महत्व"आधुनिक ड्रोन तकनीक के उपयोग से न केवल कठिन और दुर्गम इलाकों में पौधारोपण आसान हुआ है, बल्कि इससे भविष्य में क्षेत्र के हरित आवरण को तेजी से बढ़ाने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में एक मील का पत्थर साबित होगा।   

"वन विभाग का यह प्रयास "वन है तो जीवन है – अधिक से अधिक वन, हरा-भरा राजस्थान" के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।  

उपवन संरक्षक मारिया शाइन ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में अधिक से अधिक पौधारोपण किया जा सके हमे इस वर्ष 1.5 लाख हेक्टेयर में पौधारोपण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा जिले में 17 नर्सरी संचालित की जा रही है। साथ ही ड्रोन की मदद से सीड बॉल जंगल में डाली जा रही है।

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