जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में पांच प्रसूताओं की बिगड़ी तबीयत, एक महिला को गलत ब्लड चढ़ाने का मामला सामने

Edited By Anil Jangid, Updated: 18 Jul, 2026 06:04 PM

five women fall ill after cesarean deliveries at jodhpur hospital

जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर स्थित उम्मेद अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद पांच प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है।

जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर स्थित उम्मेद अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के बाद पांच प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। इनमें से दो महिलाओं की हालत गंभीर होने पर उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है, जबकि तीन अन्य महिलाओं का उपचार आईसीयू में जारी है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब एक माह पहले पावटा जिला अस्पताल में भी सिजेरियन प्रसव के बाद आठ प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने की घटना चर्चा में रही थी।

 

जानकारी के अनुसार, पिछले दो दिनों में ऑपरेशन से प्रसव कराने वाली पांच महिलाओं में प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव (पोस्टपार्टम हेमरेज) की स्थिति बनी। शुक्रवार को दो महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें तत्काल वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया, जबकि एक दिन पहले तीन अन्य महिलाओं को गंभीर स्थिति के कारण आईसीयू में भर्ती करना पड़ा। चिकित्सकों के अनुसार, प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव एक गंभीर चिकित्सा आपात स्थिति होती है और समय पर उपचार नहीं मिलने पर मरीज की जान को खतरा हो सकता है।

 

इसी बीच अस्पताल में एक और गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक प्रसूता को कथित तौर पर गलत ब्लड ग्रुप का रक्त चढ़ा दिया गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, एक जैसे नाम और पति के समान नाम होने के कारण ब्लड यूनिट की पहचान में चूक हुई। बताया गया कि महिला को पहले सही रक्त समूह ओ पॉजिटिव का रक्त चढ़ाया गया था, लेकिन दूसरी बार कथित रूप से बी पॉजिटिव रक्त चढ़ा दिया गया। इसके बाद महिला की तबीयत बिगड़ गई और उसे कंपकंपी तथा पेशाब में खून आने जैसी शिकायतें होने लगीं। बाद में उसे महात्मा गांधी अस्पताल में रेफर किया गया, जहां उसका उपचार जारी है।

 

मामले की जांच के लिए उम्मेद अस्पताल प्रशासन ने एक जांच समिति गठित की है। समिति की प्रारंभिक जांच में ब्लड यूनिट की पहचान में हुई चूक को स्वीकार किया गया है। जांच में सामने आया कि दोनों मरीजों के ब्लड ग्रुप और अन्य पहचान संबंधी विवरण अलग-अलग दर्ज थे, लेकिन ब्लड बैंक स्तर पर आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई।

 

घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी स्तर पर लापरवाही सिद्ध होती है तो संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

 

यह मामला अस्पतालों में मरीजों की पहचान, ब्लड ट्रांसफ्यूजन प्रक्रिया और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ब्लड मैचिंग और पहचान प्रक्रिया को और अधिक सख्ती से लागू करने की आवश्यकता है।

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