पुष्कर में आज से कलयुग का पहला शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ, कलश एवं भव्य शोभायात्रा से शुभारंभ

Edited By Anil Jangid, Updated: 07 Mar, 2026 01:52 PM

first shat gayatri purushcharn mahayajna of kalyug begins in pushkar

पुष्कर। तीर्थराज पुष्कर की पावन धरती पर रविवार 8 मार्च से एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व आध्यात्मिक आयोजन की शुरुआत हो रही है। कलयुग का पहला और पुष्कर का अब तक का सबसे बड़ा 43 दिवसीय शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ आज कलश एवं भव्य शोभायात्रा के साथ प्रारंभ हो...

पुष्कर। तीर्थराज पुष्कर की पावन धरती पर रविवार 8 मार्च से एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व आध्यात्मिक आयोजन की शुरुआत हो रही है। कलयुग का पहला और पुष्कर का अब तक का सबसे बड़ा 43 दिवसीय शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ आज कलश एवं भव्य शोभायात्रा के साथ प्रारंभ हो रहा है।

 

वैदिक विधि-विधान के साथ यज्ञ की शुरुआत
स्वामी प्रखर महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस महायज्ञ के शुभारंभ अवसर पर महा निर्वाणी अखाड़े के महामंडलेश्वर विशोकानंद भारती सहित अनेक संत-महात्मा भी उपस्थित रहेंगे। कलश एवं शोभायात्रा का प्रारंभ रविवार को दोपहर में ब्रह्म घाट से होगा। कलश यात्रा विभिन्न मार्गों से होते हुए खेरखड़ी रोड़ स्थित महायज्ञ स्थल तक पहुंचेगी, जहां वैदिक विधि-विधान के साथ यज्ञ की शुरुआत होगी।

 

महायज्ञ 19 अप्रैल तक 43 दिनों तक चलेगा
आयोजन समिति के अनुसार यह महायज्ञ 19 अप्रैल तक 43 दिनों तक निरंतर चलेगा। महायज्ञ के लिए विशेष रूप से 200 यज्ञ कुंड बनाए गए हैं, जहां विद्वान आचार्यों के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 200 यजमान दंपति प्रतिदिन आहुतियां देंगे।

 

विप्र गायत्री मंत्र का सामूहिक जाप करेंगे
महायज्ञ स्थल पर ही प्रतिदिन लगभग 2000 संध्या-वंदन करने वाले विप्र गायत्री मंत्र का सामूहिक जाप करेंगे। इस प्रकार पूरे आयोजन के दौरान करीब 27 करोड़ गायत्री मंत्रों के जाप का संकल्प लिया गया है, जिसे विश्व शांति और मानव कल्याण के उद्देश्य से समर्पित किया गया है।

 

वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए
यह महायज्ञ प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट और विप्र फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। महायज्ञ में भाग लेने वाले यजमानों के लिए शनिवार को भी यज्ञोपवीत संस्कार, मुंडन संस्कार, प्रायश्चित कर्म और संकल्प जैसे वैदिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए।

 

बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना
महायज्ञ आयोजन समिति के मुख्य संयोजक सुशील ओझा ने बताया कि आयोजन में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना को देखते हुए भंडारे की व्यवस्था के साथ-साथ लगभग दस हजार लोगों के ठहरने की अलग से व्यवस्था भी की गई है।

 

43 दिनों तक आध्यात्मिक वातावरण
आयोजन से पुष्कर में अगले 43 दिनों तक आध्यात्मिक वातावरण का विशेष उत्सव रहेगा और विश्व शांति के लिए सामूहिक प्रार्थना का यह महायज्ञ एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक केंद्र बनकर उभरेगा।

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