Edited By Anil Jangid, Updated: 10 Apr, 2026 07:26 PM

कोटा: कोटा में कांग्रेस पार्टी की गुटबाजी एक बार फिर से खुलकर सामने आ गई, जब शुक्रवार को शहर कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान धक्का-मुक्की और हाथापाई की घटना सामने आई। यह घटना तब हुई जब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में...
कोटा: कोटा में कांग्रेस पार्टी की गुटबाजी एक बार फिर से खुलकर सामने आ गई, जब शुक्रवार को शहर कांग्रेस कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान धक्का-मुक्की और हाथापाई की घटना सामने आई। यह घटना तब हुई जब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा का माहौल बन गया।
बैठक का आयोजन कोटा प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज और नीतीश सुराणा द्वारा किया गया था। जैसे ही जिला अध्यक्ष राखी गौतम ने अपना संबोधन शुरू किया, उन्होंने लोकसभा प्रत्याशी कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल का नाम नहीं लिया, जिससे वहां मौजूद कार्यकर्ता नाराज हो गए। उनके समर्थकों ने इस बात को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी।
नारेबाजी के बाद माहौल गरमाया और देखते ही देखते समर्थक आपस में भिड़ गए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शांति धारीवाल और प्रहलाद गुंजल के समर्थकों के बीच एक-दूसरे के पक्ष में नारेबाजी शुरू हो गई, और इससे हंगामा और बढ़ गया। बर्ताव में गुस्सा इस हद तक बढ़ा कि कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में लात-घूंसे करने लगे, जिससे हाथापाई की स्थिति उत्पन्न हो गई।
हंगामे को बढ़ता देख बैठक को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। इस घटनाक्रम ने कांग्रेस पार्टी की आंतरिक गुटबाजी और असहमति को एक बार फिर से उजागर कर दिया, जिससे पार्टी के भीतर असंतोष की स्थिति साफ नजर आई।
घटना के बाद, पार्टी नेताओं ने माहौल शांत करने का प्रयास किया, लेकिन यह घटना पार्टी के भीतर के राजनीतिक तनाव को और गहरा कर गई। इस घटना ने कांग्रेस की कार्यप्रणाली और गुटबाजी की स्थिति को उजागर किया, जो राज्य में पार्टी की एकता और समन्वय के लिए एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।