टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का प्रदर्शन, पुराने नियुक्त कार्मिकों को राहत देने की उठी मांग

Edited By Ishika Jain, Updated: 18 Jun, 2026 04:45 PM

dungarpur teachers protest against tet mandatory rule for pre 2010 appointments

शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर देशभर में चल रही चर्चा के बीच अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को इस अनिवार्यता से बाहर रखने की मांग तेज कर दी है। इसी क्रम में डूंगरपुर में संगठन के पदाधिकारियों और...

डूंगरपुर। शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को लेकर देशभर में चल रही चर्चा के बीच अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने वर्ष 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को इस अनिवार्यता से बाहर रखने की मांग तेज कर दी है। इसी क्रम में डूंगरपुर में संगठन के पदाधिकारियों और शिक्षकों ने जिला कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।

महासंघ का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा 23 अगस्त 2010 को जारी की गई अधिसूचना के बाद शिक्षक पात्रता परीक्षा को लागू किया गया था। इससे पहले नियुक्त शिक्षकों की भर्ती उस समय लागू नियमों और शैक्षणिक योग्यताओं के अनुरूप हुई थी, इसलिए उन पर बाद में लागू किए गए मानकों को लागू करना उचित नहीं होगा।

संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि लंबे समय से शिक्षा क्षेत्र में सेवाएं दे रहे शिक्षकों ने विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण और समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। ऐसे शिक्षकों को वर्षों बाद नई पात्रता शर्तों के दायरे में लाना उनके लिए चिंता और असमंजस की स्थिति पैदा कर सकता है।

महासंघ ने अपने ज्ञापन में कहा कि कई शिक्षक सेवा निवृत्ति के करीब हैं और दशकों का अनुभव रखते हैं। ऐसे में उनसे पुनः परीक्षा उत्तीर्ण करने की अपेक्षा करना व्यावहारिक रूप से कठिन है। संगठन ने इसे शिक्षकों के मनोबल और सेवा सुरक्षा से जुड़ा विषय बताया।

ज्ञापन के माध्यम से केंद्र सरकार से मांग की गई कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी रूप से छूट प्रदान की जाए। साथ ही उनकी वरिष्ठता, पदोन्नति, वेतन संबंधी अधिकारों और अन्य सेवा लाभों को पूर्ण संरक्षण दिया जाए।

महासंघ ने यह भी सुझाव दिया कि यदि आवश्यक हो तो संसद के माध्यम से विशेष प्रावधान या कानूनी संशोधन कर इस विषय का स्थायी समाधान निकाला जाए। इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर शिक्षकों के बीच व्याप्त असुरक्षा और भ्रम की स्थिति समाप्त करने की मांग भी की गई।

प्रदर्शन के दौरान संगठन के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द सकारात्मक कदम उठाएगी।

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